एसआईआर पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण , तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए फैसले, आंतरिक मतभेद की खबरों को किया खारिज

एसआईआर पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए फैसले, आंतरिक मतभेद की खबरों को किया खारिज
भोपाल यश भारत। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की 26 सितंबर को हुई पूर्ण बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR वोटर लिस्ट और आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्था में विचार विमर्श आपत्तियां और सुझाव सामान्य प्रक्रिया हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि एस आईआर और तकनीक से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने फॉर्म 6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के मुताबिक इस घोषणा पत्र की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्थिति स्पष्ट की है। वहीं एसआईआर के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक होगी।
कैबिनेट सचिव को पत्र पर भी सफाई
आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को किसी नीतिगत विवाद से जोड़ने की बात से इनकार किया। आयोग के अनुसार पत्र कमीशन या आईटी डिवीजन की किसी नीति से संबंधित नहीं था बल्कि चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा प्रशासनिक विषय था।
आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य विभाजन के आदेश दो चुनाव आयुक्तों के आदेशों के बाद लागू नहीं किए गए थे। साथ ही आईटी डिवीजन की निगरानी का अधिकार डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर से कभी वापस नहीं लिया गया।
पृष्ठभूमि में एसआईआर को लेकर उठे सवालों और आयोग के भीतर कथित असहमति की खबरों के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोग के ताजा स्पष्टीकरण का मुख्य संदेश यही है कि महत्वपूर्ण निर्णय सामूहिक सहमति से लिए गए हैं।






