पटाखों के धुएं में घिरा शहर! एकता चौक से विवेकानंद परिसर -जीरो डिग्री तक सड़क गायब, कोहरा नहीं प्रदूषण की चादर फैली, जबलपुर में वायु गुणवत्ता का बज रहा अलार्म

जबलपुर यश भारत । छोटी दिवाली की रात जहां एक ओर पूरे शहर में रोशनी और उत्सव का माहौल दिखा, वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों में पटाखों का धुआं अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। देर रात से लेकर सुबह तक एकता चौक से 0° तक पूरे क्षेत्र में घना धुआं छाया रहा, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई।
लोगों को ऐसा लगा मानो ठंड के चलते कोहरा छाया है, लेकिन पास जाकर देखा तो यह कोहरा नहीं बल्कि पटाखों से उठता प्रदूषण था। आलम यह रहा कि विवेकानंद परिसर के आगे सड़क पूरी तरह से धुएं में लिपट गई — यहां तक कि एक घर से दूसरा घर भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इतनी घनी धुंध जैसी स्थिति उन्होंने पहली बार छोटी दिवाली की रात में देखी है। प्रदूषण के इस स्तर ने न केवल दृश्यता पर असर डाला, बल्कि सांस लेने में भी लोगों को परेशानी हुई। उसी समय शहर की वायु गुणवत्ता भी खराब दिशा में जा रही है ।
शहर का समग्र जबलपुर AQI “Moderate” यानी मध्य श्रेणी में है, आंकड़ा लगभग 90 दर्ज हुआ है। वहीं PM2.5-कणों की मात्रा 30 µg/m³ व PM10 करीब 73 µg/m³ पाई गई है।
स्थान-विशिष्ट रूप से माढोताल (जबलपुर) के आंकड़े तो AQI ≈ 178 जैसे “Unhealthy” श्रेणी में भी देखे गए हैं। इस संयोग में, पटाखों से उठने वाला धुआँ, अन्धेरा और ठंड की मिलीजुली स्थिति ने दृश्यता के साथ-साथ सांस लेने की समस्या भी खड़ी कर दी है।
प्रमुख असर:
वाहन चला रहे लोगों ने महसूस किया कि जैसे मार्ग कोहरा छाया हो—असल में वे धुएँ में थे।बूढ़े, बच्चों व श्वसन रोगियों में खाँसी-गले में जलन जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
उपलब्ध वायु गुणवत्ता संकेत यह बता रहे हैं कि उत्सव के इस दिन-रात के धुएँ ने शहर की “सामान्य” स्थिति को भी छू लिया है।
अनुशंसित कदम:
शाम-रात में बाहर निकलने से बचें या मास्क पहनें।
घरों की खिड़कियाँ बंद रखें, ध्वनि एवं प्रदूषण-रोधी प्रयास करें।
विशेषकर सुबह-सुबह वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्क रहें।
स्थानीय प्रशासन से अपील करें कि पटाखे और धुएँ के नियंत्रण के लिए विशेष दाव दे।







