भोपालमध्य प्रदेश

सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस पर सस्पेंस बरकरार, आबकारी आयुक्त के विवेक पर टिका अंतिम निर्णय

सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस पर सस्पेंस बरकरार, आबकारी आयुक्त के विवेक पर टिका अंतिम निर्णय

पंकज सिंह भदौरिया

भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड की रिट अपील (942/2026) पर अपना अहम फैसला सुनाते हुए मामले को प्रशासनिक पाले में भेज दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस नवीनीकरण का फैसला अब पूरी तरह से सक्षम प्राधिकारी यानी आबकारी आयुक्त के विवेक और कानूनी मानदंडों पर निर्भर करेगा। 15 अप्रैल 2026 को हुए इस फैसले के बाद अब सबकी निगाहें आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के अगले कदम पर टिकी हैं।

पुराने लाइसेंस हुए निष्प्रभावी, अब नए सिरे से परख
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कंपनी के आठों लाइसेंस 31 मार्च 2026 को ही समाप्त हो चुके हैं। इस आधार पर राज्य सरकार के तर्क को मानते हुए अदालत ने अपील को निष्प्रभावी करार दिया। कोर्ट ने दो टूक कहा कि नवीनीकरण आवेदन पर फैसला पूरी तरह से गुण-दोष  के आधार पर लिया जाए। अदालत ने साफ किया कि वह न तो लाइसेंस जारी करने का निर्देश दे रही है और न ही इसे रोकने का; यह पूरी तरह विभाग का अधिकार क्षेत्र है।

30 दिन में करना होगा स्टॉक का निपटारा
लाइसेंस समाप्त होने के बाद डिस्टिलरी में रखे शराब के स्टॉक को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है। नियमों के मुताबिक, स्टॉक अब डिस्टिलरी अधिकारी के नियंत्रण में रहेगा। आबकारी आयुक्त की अनुमति से कंपनी को 30 दिनों के भीतर इस स्टॉक को अन्य लाइसेंसधारियों को बेचने या सरकार द्वारा निर्धारित दर पर सौंपने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पारदर्शिता की कसौटी पर विभाग
सोम डिस्टिलरीज का अतीत विभिन्न जांचों और विवादों के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे में आबकारी आयुक्त के लिए यह निर्णय काफी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील होगा। जानकारों का मानना है कि चूंकि लाइसेंस की अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए कंपनी को नए सिरे से तमाम औपचारिकताएं और पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।

अब क्या होगा आगे?
अब फोकस इस बात पर है कि आबकारी विभाग कंपनी की पात्रता, पिछले रिकॉर्ड और वर्तमान आबकारी नियमों को ध्यान में रखते हुए क्या फैसला लेता है। क्या सोम डिस्टिलरीज को दोबारा बाजार में उतरने की अनुमति मिलेगी, या नियमों की सख्ती कंपनी की मुश्किलें बढ़ाएगी? इसका फैसला जल्द ही विभाग के अंतिम आदेश से होगा।

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