भोपालमध्य प्रदेश

संगठन से निकाय चुनाव तक की बनेगी रणनीति, कांग्रेस नेता तैयार करेंगे सरकार को घेरने का रोडमैप

संगठन से निकाय चुनाव तक की बनेगी रणनीति, कांग्रेस नेता तैयार करेंगे सरकार को घेरने का रोडमैप

भोपाल, यश भारत। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को लेकर कमर कसनी शुरू कर दी है। मंगलवार को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की अध्यक्षता में चल रही बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने से लेकर आगामी नगरीय निकाय चुनाव की रणनीति और दतिया चुनाव परिणाम के राजनीतिक प्रभाव तक पर गहन मंथन किया जा रहा है।बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद हैं।
संगठन सृजन अभियान की होगी समीक्षा
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा संगठन सृजन अभियान है। कांग्रेस नेतृत्व बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा कर रहा है। जिन क्षेत्रों में संगठन कमजोर है, वहां कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर मजबूत टीम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि संगठन को केवल चुनाव के समय सक्रिय करने के बजाय लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय रखा जाए। इसके लिए बूथ कमेटियों को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय करने और जिला एवं ब्लॉक स्तर के संगठन को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हो रही है।
दतिया के नतीजे ने दिया नया राजनीतिक संकेत
दतिया चुनाव परिणाम भी बैठक के एजेंडे में अहम है। पार्टी नेतृत्व दतिया में मिले परिणाम को संगठन और कार्यकर्ताओं के मनोबल से जोडक़र देख रहा है। बैठक में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि दतिया में पार्टी को मिले राजनीतिक लाभ को प्रदेश के अन्य हिस्सों में किस तरह दोहराया जा सकता है।
वरिष्ठ नेता चुनाव परिणाम के बूथवार प्रदर्शन और स्थानीय संगठन की भूमिका की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर फोकस रहेगा, जहां कांग्रेस को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है।
सडक़ से सदन तक सरकार को घेरने की तैयारी
बैठक का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस की आक्रमक रणनीति तैयार करना भी है। जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने, आंदोलन और जनअभियान चलाने तथा विधानसभा से लेकर सडक़ तक पार्टी की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने पर वरिष्ठ नेता विचार-विमर्श कर रहे हैं।

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