जबलपुर

कलेक्ट्रेट में खुलेआम फरियादी को मारते रहे स्टैंड ठेकेदार ,मूक दर्शक बन कर विडियो बनाते रहे लोग,सिस्टम से मिले दर्द को बढ़ा रही पार्किंग, फरियाद बाद में सुनाना पहले 20 रुपए निकालो

जबलपुर यश भारत। कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार दोपहर करीब डेढ बजे उस वक्त हंगामा हो गया जब वाहन स्टैंड चलाने वाले तीन लोगों ने फरियादी के साथ जमकर मारपीट की। जिसके बाद महाकौशल लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन ने कलेक्टर को शिकायत करते हुए वाहन स्टैंड चलाने वाले और मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी भी दी कि अगर कलेक्ट्रेट में वाहन स्टैंड चलाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो उनके द्वारा आगामी दिनों पर कलेक्टे्रट में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन के सदस्यों ने बताया कि कलेक्ट्रेट में जो लोग वाहन स्टैंड चला रहे हैं उनका ठेका खत्म हो गया है। बुधवार को संगठन का सदस्य निजी काम से कलेक्टे्रट आया था जिस दौरान उसने अपना वाहन पार्किंग में खड़ा किया । जब वापस वह लौटने लगा तो स्टैंड कर्मियेां ने उससे रुपए मांगे जिस पर सदस्य ने पर्ची मांग ली। बस फिर क्या था स्टेंड कर्मियों ने युवक के साथ मारपीट कर दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला जांच में लिया है।

साइकिल सवार गरीबों, वृद्ध पीड़ितों की भी नहीं सुनता पार्किंग ठेकेदार-सरकारी कार्यालयों में वाहनों को व्यवस्थित तरीके से पार्क कराना व्यवस्था का पार्ट हो सकता है लेकिन इसके नाम पर गरीब, पीड़ित फरियादियों से पार्किंग शुल्क लेना कहां तक तार्किक है। हैरत की बात यह है जिलाधिकारी के कार्यालय में वाहनों की सुरक्षा के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं। सिस्टम से शिकायत वाले लोगों के लिए पार्किंग पीर बन गई है।

ठेका राशि अदा करने आम आदमी की जेब पर डाका-प्रशासन ने कलेक्ट्रेट की पार्किंग का ठेका पिछले कुछ वर्षों से ही उठाना शुरू किया है। करीब दो लाख रुपये से शुरू हुआ यह ठेका अब लगभग 12.40 लाख रुपए तक पहुंच गया है। जाहिर कि ठेकेदार को बड़ा मुनाफा होता है और ठेका पाने के लिए बोली लगती है। प्रशासन को ठेका राशि अदा करने और अपना मुनाफा कमाने के लिए साइकिल के 10 रुपये, स्कूटर, बाइक के 20 और कार के 30 रुपए लिए जाते हैं। ठेकेदार और उसके कारिंदे कलेक्ट्रेट में आने वालों से पार्किंग का पैसा लेने के लिए मर्यादा की हर सीमा लांघ जाते हैं। किसी काम के लिए अगर आपको एक बार कलेक्ट्रेट से बाहर जाना पड़ा और दोबारा आना पड़ा तो फिर से पार्किंग शुल्क देना होगा। यह कहां का न्याय कि सिस्टम से पीड़ित व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास आता है और उसे वहां फरियाद सुनाने से पहले साइकिल या मोटरसाइकिल की सुरक्षा के लिए पैसा खर्च करना पड़ता है।

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