हाईकोर्ट में मृत्यु-दंड मामलों की पैरवी हेतु विशेष पैनल गठित, अधिवक्ता आनंद शुक्ला को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति ने मृत्यु-दंड (डेथ रेफरेंस) से जुड़े मामलों की प्रभावी सुनवाई एवं दोषसिद्ध व्यक्तियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनुभवी अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया है। इस पैनल में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद शुक्ला को भी शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई पहल
हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति की रजिस्ट्रार-कम-सचिव अर्चना सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह विशेष पैनल सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमन सिंह बनाम बिहार राज्य प्रकरण में 27 अप्रैल 2026 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में बनाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि मृत्यु-दंड के मामलों में दोषसिद्ध व्यक्तियों को प्रत्येक स्तर पर प्रभावी और अनिवार्य कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
23 अनुभवी अधिवक्ताओं को किया गया शामिल
समिति द्वारा गठित इस विशेष पैनल में सात वर्ष से अधिक अनुभव रखने वाले कुल 23 अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है। ये सभी अधिवक्ता हाईकोर्ट की जबलपुर प्रधान पीठ में आने वाले मृत्यु-दंड एवं डेथ रेफरेंस से संबंधित मामलों में पक्षकारों की ओर से कानूनी सहायता और पैरवी करेंगे।
आनंद शुक्ला की नियुक्ति को माना जा रहा महत्वपूर्ण
अधिवक्ता आनंद शुक्ला लंबे समय से उच्च न्यायालय में सक्रिय रूप से विधिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। वे पूर्व से ही उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जबलपुर के पैनल अधिवक्ता के रूप में विभिन्न मामलों में प्रभावी पैरवी कर चुके हैं। गंभीर और संवेदनशील आपराधिक मामलों के लिए गठित इस विशेष पैनल में उनका चयन न्यायिक क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और अनुभव का प्रमाण माना जा रहा है।






