धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया, बोले- लोकतंत्र और युवाओं की आवाज की हुई जीत
सीजेपी और देश की 'जेन जी' को बधाई

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र और छात्रों के संघर्ष की जीत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जीत शांतिपूर्ण आंदोलन, धैर्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की ताकत का परिणाम है।
सोनम वांगचुक ने अपने पोस्ट में लिखा, “यह लोकतंत्र की जीत है, सीधा लोकतंत्र… जो सड़कों से निकला है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। सीजेपी और देश की ‘जेन जी’ को बधाई। साथ ही उन सभी नागरिकों का धन्यवाद, जिन्होंने भय से ऊपर उठकर देशभर से अपनी आवाज बुलंद की। अब जवाबदेही से सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का समय है।”
20 दिन के अनशन से आंदोलन को मिली नई धार
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को उस समय बड़ा समर्थन मिला, जब सोनम वांगचुक छात्रों के आंदोलन से जुड़ गए। उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की और लगातार 20 दिनों तक अनशन पर रहे। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके स्वास्थ्य को लेकर देशभर में चिंता जताई गई और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला।
वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे छात्रों के आंदोलन ने और अधिक गति पकड़ ली।
सोशल मीडिया पर साझा किया इस्तीफा
उधर, धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सार्वजनिक करते हुए लिखा कि उनका पूरा सार्वजनिक जीवन छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रालय के अधिकारियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा और शिक्षा सुधार के लिए उनका समर्पण आगे भी जारी रहेगा।







