जबलपुरमध्य प्रदेश

बप्पा की भक्ति की रंग में रंगी संस्कारधानी,सार्वजनिक पंडालों में भक्तों की उमडेगी भीड़

घर-घर गूंज रहा जय गणेश देवा और गणपति बप्पा मोरिया

जबलपुर यश भारत। 27 अगस्त से प्रारंभ हुआ 10 दिवसीय गणेश उत्सव पर्व की धूम अब चरम पर पहुंच रही है। पर्व के चलती एक ओर जहां घर-घर में विघ्न विनाशक की पूजा अर्चना का का क्रम जारी है तो वही दूसरी तरफ शहर और उपनगर क्षेत्र के गणेश मंदिरों में भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विघ्न विनाशक की विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। इस पुनीत अवसर पर गणेश मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इसके अलावा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणेश मंडलों के द्वारा भी प्रतिमाओं की स्थापना आकर्षक झांकियां के साथ की गई है और अब इन पंडालों में बप्पा के भक्तों की उमडने की बारी है।

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प्रतिवर्ष की अनुसार इस वर्ष भी सदर शहर गोरखपुर आधारताल रांझी गढा आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सार्वजनिक समितियां के द्वारा प्रतिमाओं की स्थापना कर आकर्षक विद्युत साज सज्जा भी की गई है। कहीं अमरनाथ की गुफा बनाई गई है तो कहीं भव्य स्वर्ण मंदिर तू कहीं ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर पंडाल को सजाया गया है कहीं पुलिस की वर्दी में भगवान गणेश नजर आ रहे है। मालवीय चौक अंकुर युवा संस्था सब्जी मंडी छोटा फुहारा महाराष्ट्र स्कूल सहित सदर गोरखपुर और गढा में भी भव्य पंडाल बनाए गए हैं जिनकी दर्शनार्थ अब श्रद्धालुओं की भीड़ लगने वाली है।

पुराना है सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियो का इतिहास

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वैसे तो सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमाओं की स्थापना का के संबंध में जो जानकारी मिलती है उसके अनुसार सबसे पहले सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमा की स्थापना मुंबई में की गई थी। बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से यहां 1883 में सार्वजनिक रूप से भगवान गणेश की प्रतिमा उनके दो अनुयायियों लिमये साहब और गोडसे साहब ने की थी। और इसका उद्देश्य था लोगों को इकट्ठा करके उनमें स्वराज की अलख जगाना। कहते हैं तब यहां जो गीत संगीत होता था वह भी स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होता था। अंग्रेजों के शासन के खिलाफ गीत और नारे रचे जाते थी और गाये जाते थे। मुंबई से शुरू यह सिलसिला धीरे-धीरे पूरे भारतवर्ष में फैल गया और आज उसका भव्य स्वरूप पूरे देश में दिखाई दे रहा है। कुछ जानकारों की माने तो जबलपुर में भी सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमाओं की स्थापना का इतिहास काफी पुराना है।

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