भोपालमध्य प्रदेश

भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में RSS का महाजुटान: शताब्दी वर्ष के संकल्पों और सामाजिक परिवर्तन पर मंथन

भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में RSS का महाजुटान: शताब्दी वर्ष के संकल्पों और सामाजिक परिवर्तन पर मंथन

भोपाल, यशभारत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर भव्य शाखा संगम और स्वयंसेवक एकत्रीकरण का आयोजन हुआ। इस वृहद आयोजन में भोपाल विभाग के पांच जिलों से लगभग 30 हजार स्वयंसेवकों ने अनुशासित ढंग से सहभागिता की।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और मुख्य अतिथि के रूप में एम्स भोपाल के डायरेक्टर (रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल) नरेंद्र कोतवाल उपस्थित रहे। मंच पर अतिथियों के आगमन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत ध्वज वंदन से हुई। इसके बाद मैदान पर स्वयंसेवकों ने 9 शारीरिक अभ्यासों, संघ गीत और 60 से अधिक स्वयंसेवकों की टोली द्वारा प्रस्तुत घोष वादन का शानदार प्रदर्शन कर नियमित शाखाओं के अनुशासन और शक्ति का प्रकटीकरण किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ की 100 वर्षों की यात्रा, समाज जीवन में इसके योगदान और भविष्य के संकल्पों को प्रस्तुत करना रहा। विजयादशमी 2025 से विधिवत शुरू हुए शताब्दी वर्ष के अभियानों के तहत भोपाल में आयोजित विभिन्न सामाजिक गतिविधियों की रिपोर्ट भी साझा की गई। इसके तहत गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन, सद्भाव बैठकों और प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियों के माध्यम से समाज के लाखों परिवारों और प्रबुद्ध जनों तक संघ का संदेश पहुंचाया गया है।

संबोधन में संघ द्वारा चलाए जा रहे पंच परिवर्तन अभियान पर विशेष बल दिया गया। इसके अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध और नागरिक कर्तव्य जैसे 5 प्रमुख विषयों को समाज जीवन और दैनंदिन व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया।

लाल परेड ग्राउंड के मुख्य कार्यक्रम से पूर्व सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने E-8 अरेरा कॉलोनी स्थित समाज सेवा न्यास में सुबह से विभिन्न श्रेणियों की बैठकें लीं, जिनमें श्रेणी मिलन टोलियों, संघ विकास मंडली तथा केंद्रीय संस्थानों के छात्रों व प्राध्यापकों के साथ संवाद शामिल रहा। शाम को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में शहर के 50 अति विशिष्ट प्रबुद्ध जनों के साथ विशेष बैठक और रात्रिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशासनिक व शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हुए।

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