श्राद्ध-तर्पण के साथ शुरू हुआ पितृ पक्ष, नर्मदा तटों पर उमड़े श्रद्धालु

जबलपुर,यश भारत। पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ शनिवार को नर्मदा तट ग्वारीघाट, तिलवाराघाट सहित शहर के अन्य घाटों पर श्राद्ध और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। सुबह से ही लोग वैदिक रीति-रिवाजों के साथ पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें जल अर्पित करते नजर आए। नर्मदा तटों के साथ घरों में भी पुरोहितों की मौजूदगी में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधियां शुरू हो गई हैं। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्रद्धा से किए गए श्राद्ध कर्म और तर्पण से पितरों को संतुष्टि मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूर्वजों को अर्पित किए पकवान
पितृ पक्ष के दौरान परिवारजन पिंडदान और तर्पण के साथ पूर्वजों की तिथि पर उन्हें पसंद के पकवानों का भोग भी अर्पित करते हैं। इसके बाद भोजन का एक हिस्सा परंपरा के अनुसार गाय और कौए को खिलाया जाता है। पुरोहितों और परिवार के मानदान को भी भोजन कराया जाता है।
श्राद्ध और तर्पण का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से किए जाने वाले कर्म को श्राद्ध कहा जाता है। पितरों की तृप्ति के लिए जल और तंदुल आदि अर्पित करने की प्रक्रिया तर्पण कहलाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से पूर्वजों की शांति और मुक्ति की कामना की जाती है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के श्राद्ध से हो गई है। 27 सितंबर से अश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा का श्राद्ध शुरू होगा। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करेंगे।







