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पांच साल की अड़चन के बाद फ्लाईओवर की राह साफ, हाईकोर्ट के दखल से तेज हुई कवायद

घमापुर-रद्दी चौकी फ्लाईओवर का बदलेगा रूट, एमपी टूरिज्म कार्यालय से घमापुर चौराहे के आगे तक बनाने का सुझाव

जबलपुर। यशभारत। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल घमापुर और आंबेडकर चौक की यातायात समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित फ्लाईओवर को लेकर लंबे इंतजार के बाद उम्मीद जगी है। करीब पांच साल से अटकी परियोजना पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। सोमवार को हुई सुनवाई में सरकार ने क्षेत्र के ट्रैफिक दबाव, सड़क की स्थिति और संभावित अतिक्रमण को लेकर किए गए आकलन की जानकारी कोर्ट को दी। सरकार ने विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। अब अगली सुनवाई में फ्लाईओवर के रूट को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

पुराना रूट बदलेगा, नया विकल्प सामने

फ्लाईओवर के लिए पहले जिस रूट की योजना बनाई गई थी, वह होटल ऋषि एजेंसी से शुरू होकर रद्दी चौकी के आगे तक जाने और अब्दुल हमीद चौक के पास समाप्त होने का था। जनहित याचिका में भी इसी बड़े रूट पर फ्लाईओवर बनाने की मांग की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक वैकल्पिक रूट सुझाया है। इसके तहत एमपी टूरिज्म कार्यालय से फ्लाईओवर शुरू कर घमापुर चौराहे के आगे उतारने का सुझाव सामने आया है। इस रूट पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। सरकार अगली सुनवाई में अपना प्रस्ताव रखेगी।

घमापुर और आंबेडकर चौक को मिलेगी बड़ी राहत

घमापुर, आंबेडकर चौक और आसपास का इलाका लंबे समय से भारी यातायात दबाव से जूझ रहा है। क्षेत्र में हाईकोर्ट, जिला न्यायालय, राज्य न्यायिक अकादमी, तहसील कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान होने के साथ अस्पतालों के कारण भी लगातार वाहनों की आवाजाही रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में यहां जाम की स्थिति बनना आम बात है। प्रस्तावित फ्लाईओवर बनने से मुख्य यातायात को अलग मार्ग मिलने की उम्मीद है। इससे घमापुर चौराहे के साथ आंबेडकर चौक, हाईकोर्ट के सामने और कलेक्ट्रेट चौराहे के आसपास भी यातायात दबाव कम हो सकता है।

रूट तय होते ही अतिक्रमण पर चलेगा निगम का अमला

फ्लाईओवर निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की होगी। सरकार ने प्रस्तावित रूट के दायरे में आने वाले निर्माणों का आकलन शुरू कर दिया है। रूट अंतिम रूप से तय होने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज हो सकती है। सुनवाई के दौरान एल्गिन अस्पताल के आसपास गुमटियां लगाने वाले कुछ दुकानदार भी कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने अपनी दुकानों से यातायात प्रभावित नहीं होने का तर्क देते हुए राहत की मांग की, लेकिन कोर्ट ने नियमों के विपरीत बनी दुकानों को राहत नहीं दी। इससे आने वाले दिनों में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।

186 करोड़ से बढ़कर 269 करोड़ पहुंची परियोजना लागत

फ्लाईओवर परियोजना की लागत भी पिछले वर्षों में काफी बढ़ चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 11 दिसंबर 2019 को 186.03 करोड़ रुपए का अनुमान भेजा गया था। लंबे समय तक परियोजना आगे नहीं बढ़ने के बाद लागत बढ़कर 269.22 करोड़ रुपए हो गई 28 जुलाई 2022 को संशोधित अनुमान के साथ रूट का नक्शा भी तैयार किया गया था। अधिकारियों की रिपोर्ट में क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं के कारण फ्लाईओवर की जरूरत बताई गई थी। परियोजना में देरी से सरकारी खर्च बढ़ने का मुद्दा भी जनहित याचिका में उठाया गया है।

विधायक लखन घनघोरिया ने कई बार उठाया मुद्दा

फ्लाईओवर निर्माण में देरी का मामला कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया लंबे समय से उठाते रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में कई बार सवाल पूछने के साथ मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को ज्ञापन भी दिए। वर्ष 2021 से 2024 के बीच अलग-अलग अवसरों पर परियोजना की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद वर्ष 2025 में उन्होंने जनहित याचिका दायर कर फ्लाईओवर निर्माण में तेजी लाने की मांग की। याचिका में आंबेडकर चौक से रद्दी चौकी तक फ्लाईओवर बनाने तथा मदार टेकरी होकर मार्ग विकसित करने का सुझाव भी दिया गया था। याचिका में देरी के कारण बढ़ती लागत और आम लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया गया।

31 अगस्त को हुई सुनवाई में सरकार ने विस्तृत जवाब देने के लिए और मांगा

सोमवार की सुनवाई के बाद अब सरकार को फ्लाईओवर का विस्तृत प्रस्ताव कोर्ट के सामने रखना है। इसमें रूट, सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण सहित अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी शामिल हो सकती है। फिलहाल फ्लाईओवर निर्माण शुरू होने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है और अंतिम रूट भी तय नहीं हुआ है। लेकिन हाईकोर्ट की निगरानी में प्रक्रिया आगे बढ़ने से वर्षों से लंबित परियोजना को गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यदि प्रस्तावित रूट को मंजूरी मिलती है तो घमापुर और आंबेडकर चौक के साथ आसपास के व्यस्त इलाकों को यातायात जाम से बड़ी राहत मिल सकती है। अब शहरवासियों की निगाह अगली सुनवाई पर है, जहां फ्लाईओवर के भविष्य और अंतिम रूट को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।

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