भोपालमध्यप्रदेश

छात्रावास में छात्राओं का प्रदर्शन जारी, खाने में कीड़े मिलने और दूषित पानी की शिकायतों पर आक्रोश

छात्रावास में छात्राओं का प्रदर्शन जारी, खाने में कीड़े मिलने और दूषित पानी की शिकायतों पर आक्रोश

वार्डन के इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा विरोध, पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग

भोपाल यश भारत। पंचशील नगर स्थित शासकीय अनुसूचित जाति महाविद्यालय के छात्रावास में छात्राओं का प्रदर्शन जारी है। छात्रावास में खाने में कीड़े मिलने और पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर की गई शिकायतों के बाद छात्राओं में नाराजगी है। विवाद के बीच वार्डन ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन छात्राओं का कहना है कि उनकी मूल समस्याओं का समाधान नहीं होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास के भोजन का बजट बढ़ने के बावजूद उन्हें गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक खाना नहीं मिल रहा है। भोजन की गुणवत्ता को लेकर लगातार परेशानी हो रही है। छात्राओं ने पीने के पानी की स्वच्छता पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी

छात्राओं ने छात्रावास में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि रात के समय किसी छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर पुरुष स्टाफ उसे डॉक्टर के पास लेकर जाता है। रात में महिला स्टाफ की मौजूदगी नहीं होने से छात्राओं को असहजता और परेशानी का सामना करना पड़ता है। छात्राओं की मांग है कि रात के समय भी पर्याप्त महिला स्टाफ उपलब्ध कराया जाए, ताकि आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित और समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।

भोजन, पानी और सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग

छात्राओं ने मांग की है कि छात्रावास में गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए  पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जाए। इसके साथ ही रात के समय पर्याप्त महिला स्टाफ की तैनाती की मांग भी उठाई गई है।

वार्डन के इस्तीफे के बावजूद छात्राओं का प्रदर्शन जारी रहना इस बात की ओर संकेत करता है कि वे केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि छात्रावास की व्यवस्थाओं में ठोस सुधार चाहती हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी छात्राओं की शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं और उनकी मांगों का समाधान कब तक किया जाता है।

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