अब शुगर के मरीजों के लिए काले चावल बने वरदान, शुगर लेवल को बढ़ते देख इसने भी बाजार में बढ़ा दी डिमांड किसानो को अब मिलेगा इसका फायदा

अब शुगर के मरीजों के लिए काले चावल बने वरदान, शुगर लेवल को बढ़ते देख इसने भी बाजार में बढ़ा दी डिमांडकिसानो को अब मिलेगा इसका फायदा राज्यों में चावल की खेती सबसे ज्यादा होती है वंहा पर लोग इसका उपयोग भी ज्यादा करते है। शुगर के मरीजों को इसका परहेज करना पड़ता है। कई ऐसे लोग है जिनको चावल खाना बेहद पसंद है लेकिन इस बीमारी की वज़ह से वह कई सालो से चावल नहीं खा रहे। आपको बता दे की अब शुगर के मरीज भी चावल खा सकते है लेकिन उनके लिए सफ़ेद चावल नहीं बल्कि काले चावल फायदेमंद है। आइये जानते है इसके बारे में
अब शुगर के मरीजों के लिए काले चावल बने वरदान, शुगर लेवल को बढ़ते देख इसने भी बाजार में बढ़ा दी डिमांड किसानो को अब मिलेगा इसका फायदा

ब्लैक राइस की खेती से किसानो की चमकेगी अब किस्मत
छत्तीसगढ़ में करतला ब्लॉक में शुरुआत से अब तक किसान धान की परम्परागत खेती करते आ रहे थे। दो साल पहले समाजसेवी संस्था बुखरी गांव विकास शिक्षण समिति ने इस दिशा में प्रयास शुरू किए। शुरुआत छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला ब्लॉक से हुई। यहां के चुनिंदा किसानों ने दस एकड़ में ब्लैक राइस की फसल लगाई। पहले ही साल में किसानों के काले चावल हाथों-हाथ सफेद चावल से दोगुनी कीमत पर बिक गए।
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काले चावल बाजार में 400 रुपए प्रतिकिलो में बिकते
आपको बता दे की ब्लैक राइस की कीमत मार्केट में काला चावल 400 रुपए प्रतिकिलो में बिक रहा है। इसकी खेती से किसान 100 रुपए किलो तक लाभ कमा रहे है। पश्चिम बंगाल की एक ट्रेडिंग कंपनी ने 25 टन ब्लैक राइस का ऑर्डर किया है। बड़े शहरों में यह चावल 400 रुपये किलोग्राम तक बिक रहा है।112 किसान 250 एकड़ में कर रहे ब्लैक राइस की खेती यही वजह है कि
अब शुगर के मरीजों के लिए काले चावल बने वरदान, शुगर लेवल को बढ़ते देख इसने भी बाजार में बढ़ा दी डिमांड किसानो को अब मिलेगा इसका फायदा

अगले साल कोरबा में काले चावल की खेती का दायरा सौ एकड़ तक फैल गया। करीब 25 टन ब्लैक राइस का उत्पादन हुआ। इसे कोलकाता की एक ट्रेडिंग कंपनी ने खरीद लिया था, इससे 50 टन ब्लैक राइस का उत्पादन होगा। मध्यप्रदेश में संभवतः पहली बार किसी किसान ने काले चावल की खेती की है, जिसके बाद से ही भारत सिंह पूरे राज्य में अब चर्चा का विषय बन गए हैं। शिवपुरी में काले चावल की खेती शुरु करने वाले किसान भारत सिंह ने बताया इस फसल की खेती पूरी तरह से ऑर्गेनिक तरीके से की गई है। इसमें किसी भी तरह के केमिकल खाद का यूज़ नहीं किया था। इसमें सिर्फ गाय के मूत्र का इस्तेमाल हुआ है।
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