मध्य प्रदेश

1,895 सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब शिक्षकों की कमी को लेकर जनहित याचिका, सीएजी रिपोर्ट का हवाला शिक्षा विभाग को नोटिस जारी

1,895 सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

शिक्षकों की कमी को लेकर जनहित याचिका, सीएजी रिपोर्ट का हवाला शिक्षा विभाग को नोटिस जारी

भोपाल यश भारत। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं होने का दावा करते हुए इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी ने जनहित याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिका में वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि सात हजार करोड़ रुपये से अधिक के शिक्षा बजट के बावजूद हजारों सरकारी स्कूल शिक्षक विहीन हैं। इससे लाखों विद्यार्थियों का शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान प्रदत्त शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन बताया है। मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से शिक्षक नियुक्तियों की वर्तमान स्थिति, शिक्षा बजट के उपयोग और सीएजी रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों पर पड़ा है। सत्र 2018 19 में हाईस्कूल का उत्तीर्ण प्रतिशत 67.74 फीसदी था जो सत्र 2021-22 में घटकर 38.53 फीसदी रह गया। प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे अदालत के समक्ष स्पष्ट करें कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बजट के प्रभावी उपयोग के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई में सरकार का जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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