नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल की मर्चुरी 69 साल बाद हाईटेक
50 लाख की 4 आधुनिक टेबिल स्थापित, शव को बार-बार उठाने की अब जरूरत नहीं होगी

जबलपुर, यशभारत। कुछ साल पहले तक सरकारी अस्पताल का नाम सुनते ही सबके रोंगटे खड़े हो जाते थे, जिसने अपने जीवन में कभी राय नहीं दी वो भी सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर अपने प्रतिक्रिया देते हुए कही न कहीं नजर आ ही जाता था। परंतु कुछ सालों में सरकारी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं ने वो कर दिखाया जिसकी कभी कल्पना नहीं की जा सकती थी। फिलहाल यहां बात हो रही नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के मुर्चरी विभाग की। पूरे 69 साल बाद यह विभाग हाईटेक हुआ है। करीब 50 लाख की लागत से 4 आधुनिक टेबिल विभाग में स्थापित की गई है। इन टेबिलों के बाद से मुर्चरी विभाग हाईटेक हो गया है। मर्चुरी विभाग की स्थापना करीब 1955 में हुई थी इसके बाद से कभी भी यहां की व्यवस्थाएं चेंज नहीं हुई हैं।
अब शव को बार-बार उठाने की जरूरत नहीं होगी
मर्चुरी विभाग को 4 टेबिल आधुनिक टेबिलें मिलने के बाद सबसे पहले समस्या शव को बार-बार उठाने की थी वह समाप्त हो जाएगी। क्योंकि आधुनिक टेबिल में शव के वजन से लेकर नापने का स्केल और आरा मशीन लगी हुई जिसकी वजह से एक बार शव को लिटाने के बाद उसे दोबारा उठाने की जरूरत नहीं होगी।
10 मिनिट में हो जाएगा एक पीएम
अभी तक एक शव के पीएम में आधा से एक घंटा लग जाता है लेकिन आधुनिक टेबिल मिलने के बाद मर्चुरी विभाग के कर्मचारी अब एक पीएम मुश्किल 10 मिनिट में पूरा कर लेंगे। कर्मचारियों ने बताया कि पुराने तरीके से पीएम करने में कई तरह की कठनाईयां आती थी बगैर मशीन के सिर से लेकर अन्य अंगाों को खोलना होता था लेकिन आधुनिक टेबिल लगने से अब ऐसा नहीं होगा।
अब डाॅक्टरों को इंफेक्शन नहीं होगा
मर्चुरी विभाग के डाॅक्टरों ने बताया कि आधुनिक मशीन से लैस टेबिलों की वजह से सबसे ज्यादा राहत उनको है, क्योंकि पहले पीएम करते वक्त बहुत सारे इंफेक्शन हो जाते थे जिसके कारण कई दिनों तक बीमार होकर घर में आराम करना होता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
बड़े जिलों के सरकारी अस्पतालों में है व्यवस्था
बताया जा रहा है कि आधुनिक टेबिल फिलहाल भोपाल, इंदौर सहित कुछ अन्य जिलों में है यह पहली बार जब जबलपुर मेडिकल काॅलेज को इस तरह की टेबिल मुहैया कराई गई है। विभागीय डाॅक्टरों का कहना है कि पूर्व में कुछ टेबिल आई थी परंतु उन्हें लौटा दिया गया था क्योंकि उससे कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।











