जीसीएफ में अगले सत्र से बनेगी माउंटेड धनुष तोप,पांच साल के लिए सेना देगी 300 तोपों का इनडेंट
ऑपरेशन सिंदूर में धनुष के बेहतर प्रदर्शन के बाद सेना का फैसला

जबलपुर, यश भारत।संस्कारधानी जबलपुर की सबसे पुरानी निर्माणी गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) को भारतीय सेना की ओर से अगले सत्र 2026-27 से आगामी पांच वर्ष के 300 ‘धनुष’ तोपों का मांग पत्र देने का पूरी तरह मन बना लिया है। अभी तक स्वतंत्र रूप से केवल जीसीएफ ही इसका निर्माण कर रही थी। लेकिन अब एल एन टी कंपनी की सहभागिता से माउंटेड धनुष गन बनाई जायेगी। जीसीएफ ने एक प्रोटोटाइप यानि माडल बना लिया है।बड़ा रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर औपचारिक मुहर लग सकती है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दमदार प्रदर्शन
भारतीय सेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जबलपुर में निर्मित ‘धनुष’ तोपों का इस्तेमाल किया गया था। इस ऑपरेशन में तोपों की सटीक मारक क्षमता और विश्वसनीयता ने सेना का भरोसा और मजबूत किया। धनुष तोप की खूबी यह है कि इसमें 99 फीसदी पुर्जे स्वदेशी हैं।जो आत्म निर्भर भारत की सोच को और ऊंचाई पर ले जाती है। मैदानी सफल प्रदर्शन के बाद अब जीसीएफ को बड़े ऑर्डर की उम्मीद और बढ़ गई है।

2012 के ऑर्डर में प्रदर्शन बना आधार
दरअसल, साल 2012 में फैक्ट्री को 114 धनुष तोपों का ऑर्डर मिला था, जिसका डिलीवरी टारगेट 10 वर्षों का तय किया गया था। अब तक 54 तोपों की डिलीवरी की जा चुकी है, जबकि 19 तोपें डिलीवरी के लिए तैयार हैं। इस तरह फैक्ट्री 60 प्रतिशत से अधिक उत्पादन और सप्लाई का प्रदर्शन कर चुकी है। सेना का भी कहना था कि यदि धनुष तोप का पचास फीसदी आर्डर पूरा होता है तो अगले पांच साल के लिए आर्डर दिया जाएगा।जो उसके भरोसे को मजबूत करता है। इसी प्रदर्शन पर टिका नया बड़ा ऑर्डर फैक्ट्री के इसी बेहतर प्रदर्शन के आधार पर अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रस्तावित 300 धनुष तोपों का ऑर्डर भी जबलपुर की GCF को मिल सकता है।
धनुष’ तोप की खासियत
धनुष 155 मिमी, 45 कैलिबर की अत्याधुनिक तोप है, जिसकी मारक क्षमता 38 से 42 किलोमीटर तक है। इसमें 95 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देता है।
सेना और शहर—दोनों को होगा फायदा
यदि यह ऑर्डर स्वीकृत होता है तो भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।वहीं, जबलपुर में उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और शहर की पहचान देश के प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में और मजबूत होगी।







