मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल: रक्षित निरीक्षकों और सूबेदारों के तबादले

भोपाल, : मध्य प्रदेश पुलिस स्थापना बोर्ड ने आज एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कई रक्षित निरीक्षकों और सूबेदारों के अस्थायी तबादले किए हैं। ये तबादले आगामी आदेश तक प्रभावी रहेंगे और पुलिस विभाग में विभिन्न इकाइयों में अधिकारियों की नई पदस्थापना सुनिश्चित करेंगे।
रक्षित निरीक्षकों के तबादले
जिन रक्षित निरीक्षकों का तबादला किया गया है, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- अंजूबाला मालवीय, जो पहले पीटीआरआई पुलिस मुख्यालय भोपाल में रक्षित निरीक्षक थीं, अब जिला भोपाल (शहर) में पदस्थ की गई हैं।
- आरती कतिजा, जो पीटीसी भौरी भोपाल में कार्यवाहक रक्षित निरीक्षक थीं, उन्हें भी जिला भोपाल (शहर) भेजा गया है।
- ज्योति दुबे, जो यातायात अनूपपुर में कार्यवाहक रक्षित निरीक्षक थीं, अब उन्हें रक्षित निरीक्षक अनूपपुर के पद पर पदस्थ किया गया है।
- अरविंद सिंह दांगी, जो रक्षित निरीक्षक खंडवा में कार्यरत थे, उन्हें यातायात इंदौर (शहर) में स्थानांतरित किया गया है।
सूबेदारों के तबादले
इसी आदेश के तहत, कई सूबेदारों के भी तबादले किए गए हैं, जिससे विभिन्न जिलों में उनकी जिम्मेदारियां बदलेंगी:
- सुभाष सतपाडिया, जो जिला अलीराजपुर में सूबेदार थे, उन्हें जिला उज्जैन भेजा गया है।
- अम्बरीश कुमार साहू, जो जिला सतना में सूबेदार थे, उनका तबादला जिला अनूपपुर में किया गया है।
- भारती आर्या, जो जिला दमोह में कार्यरत थीं, अब जिला इंदौर (शहर) में अपनी सेवाएं देंगी।
- भागीरथ अहिरवार, जो पहले जिला इंदौर (शहर) में थे, उन्हें जिला विदिशा में पदस्थ किया गया है।
- कृष्णा सिंह/मिश्रा, जो जिला इंदौर में सूबेदार थे, अब जिला मैहर में पदस्थ किए गए हैं।
- योगेन्द्र कुमार मरावी, जो जिला राजगढ़ में कार्यरत थे, उनका तबादला जिला बालाघाट में किया गया है।
तबादला नीति और निर्देश
मध्य प्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक/एफ 6-1/2024/एक/9 भोपाल, दिनांक 29 अप्रैल 2025 द्वारा जारी स्थानांतरण नीति 2025 के बिंदु क्रमांक 42 के अनुसार, इन सभी अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी निलंबन में है, तो उसे कार्यमुक्त न किया जाए और इस संबंध में तत्काल कार्यालय को सूचित किया जाए।इन तबादलों को पुलिस विभाग में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और विभिन्न इकाइयों में उपयुक्त बल संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।






