
अयोध्या: राम मंदिर की दान पेटी से कथित धनराशि चोरी के मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई तेज हो गई है। मामले में बड़ा कदम उठाते हुए दान की गणना में लगे 35 से 40 कर्मचारियों को हटा दिया गया है। इन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही थी, जिसके बाद बैंक ने उनकी जगह नए कर्मचारियों की तैनाती कर दी है। अब चढ़ावे की गिनती कड़ी निगरानी में कराई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जानी थी, लेकिन जांच में कई तकनीकी और तथ्यात्मक खामियां सामने आने के कारण रिपोर्ट में देरी हुई। अब उम्मीद है कि सोमवार को रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी जाएगी, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर ऐसी खबरें बेहद दुखद हैं। उन्होंने SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि सीसीटीवी फुटेज के गायब होने जैसे गंभीर मुद्दों की गहराई से जांच होनी चाहिए।
वहीं, सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को जांच में राहत मिल सकती है। शुरुआती जांच में उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष जानकारी या संलिप्तता सामने नहीं आई है। हालांकि, कुछ सेवादारों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है।
रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद SIT की टीम दोबारा अयोध्या पहुंच सकती है। बताया जा रहा है कि इस चरण में सोशल मीडिया पर आरोप लगाने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है और उनके दावों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच होगी।
उधर, बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि चोरी या गबन की पुष्टि होती है तो पूरी रकम की रिकवरी की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी से बचने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ही SIT का गठन किया गया है।






