जीतू पटवारी की चुनौती- दम है तो मुझे गिरफ्तार करो, कार्यकर्ताओं को अवैध हिरासत में क्यों रखा?

जीतू पटवारी की चुनौती- दम है तो मुझे गिरफ्तार करो, कार्यकर्ताओं को अवैध हिरासत में क्यों रखा?
भोपाल, यशभारत। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के विवाद में मध्यप्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं में निखिल, बिलाल और इनाम शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की दमनकारी नीति करार दिया है।
30 घंटे से हिरासत में कार्यकर्ता, तन्खा पहुंचे कोर्ट
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि पुलिस ने शुरुआत में 7 कार्यकर्ताओं को उठाया था, जिनमें से 4 को छोड़ दिया गया। तन्खा के मुताबिक, तीन कार्यकर्ता पिछले 30 घंटों से बिना किसी ठोस आधार के साइबर पुलिस की हिरासत में हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी को टैग करते हुए निराशा जताई और कहा कि हमारी लीगल टीम इस अवैध हिरासत के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रही है। तन्खा ने तर्क दिया कि जो पत्र 15 अप्रैल से लाखों लोगों द्वारा साझा किया जा रहा था, उस पर अचानक 18 अप्रैल को फर्जी बताकर कार्रवाई करना अनुचित है।
जीतू पटवारी की चुनौती: कार्यकर्ताओं को नहीं, मुझे गिरफ्तार करो
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पत्र में महिला आरक्षण की आड़ में अवैध परिसीमन के संकेतों जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। पटवारी ने कहा कि भाजपा डरी हुई है और बौखलाहट में कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे, वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़े हैं और इस लड़ाई में झुकेंगे नहीं।
राजस्थान पुलिस की कार्रवाई की आहट
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक के अनुसार, राजस्थान पुलिस इन कार्यकर्ताओं को अपने साथ ले जाने की तैयारी में है। उन्होंने बताया कि पुलिस कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर भी इस मामले में स्पष्ट जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने सवाल उठाया कि जब यह पत्र लाखों लोगों ने साझा किया, तो केवल चुनिंदा कार्यकर्ताओं पर ही एफआईआर क्यों की गई?
वसुंधरा राजे ने बताया विरोधियों की साजिश
इस पूरे विवाद पर विराम लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा पत्र पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने इसे विरोधियों की कारगुजारी बताते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारीशक्ति वंदन अधिनियम का पूरी तरह समर्थन करती हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भ्रम फैलाने वाले लोग चौथी बार भी विपक्ष में बैठने की तैयारी कर चुके हैं।
क्या है वायरल पत्र का विवाद?
कथित पत्र में वसुंधरा राजे के हवाले से महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर तीखे सवाल पूछे गए थे। पत्र में मोहन भागवत के मौन और भाजपा की वर्तमान कार्यशैली को ‘सत्ता-लोभ’ से प्रेरित बताया गया था। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए यह कूट रचित पत्र तैयार कर वायरल किया है।







