पड़ाव वाली महाकाली का विसर्जन,हजार लोगों ने दी माता को विदाई
5 किमी की दूरी 18 घंटे में हुई पूरी

जबलपुर,यशभारत। संस्कारधानी जबलपुर का दशहरा शरद पूर्णिमा पर पड़ाव वाली महाकाली के विसर्जन के साथ ही सम्पन्न हो गया। देश में जबलपुर इकलौता ऐसा शहर है जहां दशहरा 6 दिनों तक मनाया जाता है। यहां मुख्य चल समारोह के पांच दिन बाद शरद पूर्णिमा को अंतिम प्रतिमा का विसर्जन होता है। इनमें सबसे ज्यादा लोग पड़ाव वाली महाकाली के विसर्जन जुलूस में शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि पड़ाव वाली महाकाली सभी की मनोकामना पूरी करती हैं। इसलिए उन्हें मनोकामना या मन्नत महाकाली भी कहा जाता है।
5 किमी की दूरी 18 घंटे में हुई पूरी
माता महाकाली पड़ाव में जिस स्थान पर रखी जाती हैं, वहां से विसर्जन कुंड या नर्मदा तट ग्वारीघाट की दूरी महज 5 किमी है। जिसे आम तौर पर कोई भी व्यक्ति पैदल चलते हुए 1 से डेढ़ घंटे में तय कर सकता है। किंतु पड़ाव वाली महाकाली का विसर्जन जुलूस करीब 18 घंटे में तय हुआ। इस बीच 150 से ज्यादा स्वागत मंच के माध्यम से माता महाकाली का पूजन और स्वागत किया गया। आधी रात को भी इनके साथ करीब 10 हजार लोगों की भीड़ चलती नज़र आई। सुबह जब विसर्जन हुआ तब भी ये भीड़ बनी रही। सोमवार को हुए विसर्जन में मार्मिक दृश्य देखने मिले। माता की विदाई में लोगों की आंखें तक नम हो गईं।






