एमपी में 21 साल बाद सडक़ों पर लौटेंगी सरकारी बस

एमपी में 21 साल बाद सडक़ों पर लौटेंगी सरकारी बस
– जनबस मॉडल को कैबिनेट की मंजूरी
– 6 हजार से ज्यादा रूट पर चलेंगी 10879 बसें
भोपाल यशभारत। मध्यप्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बसों की वापसी होने जा रही है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि जनबस नाम से सरकारी बस सेवा फिर से शुरू की जाएगी। इसके लिए यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक नई सरकारी कंपनी बनाई गई है, जो पूरे प्रदेश में बसों का संचालन रूट प्रबंधन और किराया नियंत्रण का काम संभालेगी। यह व्यवस्था पुराने रोडवेज मॉडल से आधुनिक और तकनीकी रूप से कहीं अधिक उन्नत होगी। कंपनी के संचालक मंडल ने 6 हजार से ज्यादा रूटों को मंजूरी दे दी है। इन रूटों पर 10879 बसें दौड़ेंगी जिनमें शहरों के बीच (इंटरसिटी), ग्रामीण क्षेत्रों, जिला मुख्यालयों और लंबी दूरी की सेवाएं शामिल होंगी। इस कदम को प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने वाला सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।
इंदौर से होगी शुरुआत
नई व्यवस्था का सेंट्रलाइज्ड सिस्टम अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इसके लिए इंदौर को पहला केंद्र चुना गया है, जिसे राज्य की आर्थिक राजधानी और ट्रांसपोर्ट हब माना जाता है। इंदौर में सफल संचालन के बाद चरणबद्ध तरीके से यह मॉडल प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में लागू किया जाएगा। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अप्रैल 2027 तक पूरी तरह नया बस नेटवर्क राज्य में सक्रिय हो जाए।
क्यों जरूरी हुई सरकारी बसों की वापसी
मध्यप्रदेश में 2003 के बाद से रोडवेज बंद हो गई थी। तब से निजी बस ऑपरेटरों पर ही निर्भरता रही। कई जिलों में निजी बसें कम होने से ग्रामीणों को परिवहन संकट का सामना करना पड़ता है। समय पर बसें न मिल पाना, मनमाना किराया, सुरक्षा और सुविधा की कमी लंबे समय से यात्रा को मुश्किल बना रहे थे। सरकार का मानना है कि नई जनबस सेवा से यात्रियों को सुरक्षित, सस्ती और समयबद्ध यात्रा मिलेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी बसें आसानी से उपलब्ध होंगी।
कैसा होगा जनबस मॉडल
1. सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन सिस्टम
पूरे प्रदेश का संचालन मुख्य केंद्र से किया जाएगा। बसों की लोकेशन, समय-सारिणी, रूट अपडेट और मेंटेनेंस डिजिटल मॉनिटरिंग से होगा। यात्रियों को मोबाइल ऐप और पोर्टल पर लाइव बस ट्रैकिंग की सुविधा मिलेगी।
2. किराए का एक समान ढांचा
पूरे प्रदेश में किराया सरकारी कंपनी तय करेगी। इससे मनमाने किराए पर रोक लगेगी और यात्रियों को पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी।
3. बसों का आधुनिक बेड़ा
सभी बसों में पैनिक बटन, स्मार्ट टिकटिंग सिस्टम और बेहतरीन सुरक्षा मानक अनिवार्य होंगे। जरूरत के अनुसार एसी और नॉन-एसी दोनों तरह की बसें उपलब्ध रहेंगी।
4. 25 जिलों में प्रारंभिक संचालन
पहले चरण में कंपनी 25 जिलों में बसें संचालित करेगी। बाद में प्रदेश के सभी 52 जिलों में जनबस मॉडल लागू किया जाएगा।
5. रोजगार और निवेश बढ़ेगा
नई सरकारी कंपनी के संचालन से हजारों नौकरियों के अवसर खुलेंगे। चालक, परिचालक, तकनीकी स्टाफ, मेंटेनेंस व प्रशासनिक पदों पर बड़े पैमाने पर भर्तियाँ होंगी।
प्रदेश के परिवहन को बदलने की तैयारी
सरकार मानती है कि यह योजना मध्यप्रदेश के सार्वजनिक परिवहन सिस्टम को आधुनिक करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। 21 साल बाद सरकारी बसों की वापसी न केवल यात्रियों को राहत देगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की आवाजाही भी आसान बनाएगी। अप्रैल 2027 के बाद प्रदेश में एकिित्रत, सुरक्षित और सुलभ बस नेटवर्क स्थापित होने की उम्मीद है, जिससे लाखों यात्रियों को प्रतिदिन लाभ मिलेगा।







