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कान्हा में 42 दिन इलाज के बाद मादा बाघ शावक की मौत : कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण की आशंका, अब तक 7 बाघों की मौत, रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो संख्या 8 होगी

मंडला/बालाघाट। कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की जोन में करीब दो वर्षीय मादा बाघ शावक की 42 दिनों तक उपचार के बाद मौत हो गई। शावक को 26 अगस्त को गश्ती दल ने जंगल में बेहद कमजोर और असहाय अवस्था में देखा था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू कर उपचार के लिए वन्यप्राणी उपचार केंद्र में भर्ती कराया था।

उपचार के दौरान शावक में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) संक्रमण से जुड़े लक्षण पाए गए थे। हालांकि, वन विभाग ने अभी मौत का अंतिम कारण CDV को नहीं माना है। मौत के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार पोस्टमार्टम कराया गया और आवश्यक नमूने जांच के लिए जबलपुर स्थित जांच केंद्र भेजे गए हैं। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण की पुष्टि हो सकेगी।

42 दिन तक चला उपचार

वन विभाग के अनुसार, 26 अगस्त को गश्ती दल को शावक जंगल में अत्यंत कमजोर हालत में मिला था। उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल रेस्क्यू कर विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया। करीब 42 दिनों तक उपचार और निगरानी के बावजूद उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और अंततः उसकी मौत हो गई।

CDV संक्रमण की आशंका से बढ़ी चिंता

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस वन्य मांसाहारी जीवों के लिए गंभीर और अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी मानी जाती है। यह संक्रमण संक्रमित आवारा या पालतू कुत्तों तथा अन्य संक्रमित मांसाहारी वन्यजीवों के संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। बाघों में संक्रमण होने पर कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी और तंत्रिका तंत्र से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कान्हा टाइगर रिजर्व में इस वर्ष CDV से जुड़े मामलों में अब तक 7 बाघों की मौत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इस मादा शावक की मौत ने एक बार फिर संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि जबलपुर से प्राप्त जांच रिपोर्ट में CDV संक्रमण की पुष्टि होती है, तो इस वर्ष इससे संबंधित मौतों की संख्या 8 हो जाएगी।

बफर क्षेत्र में कुत्तों की निगरानी पर जोर

संक्रमण के संभावित स्रोतों को देखते हुए पार्क प्रबंधन द्वारा बफर क्षेत्र में आवारा और पालतू कुत्तों की निगरानी तथा टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वन क्षेत्र से लगे ग्रामीण इलाकों में कुत्तों की मौजूदगी और वन्यजीवों के संपर्क को CDV के संभावित जोखिम से जोड़कर देखा जाता है।

फिलहाल वन विभाग की नजर जबलपुर जांच केंद्र से आने वाली रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मादा बाघ शावक की मौत वास्तव में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के संक्रमण के कारण हुई थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

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