मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी किसानों की चिंता – जून में बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे

मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी किसानों की चिंता
– जून में बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे
भोपाल, यश भारत । मध्यप्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीदों के विपरीत नजर आ रही है। जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश हिस्से मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। सामान्यतः जून के मध्य तक प्रदेश में सक्रिय हो जाने वाला मानसून इस बार धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते बारिश का आंकड़ा भी अपेक्षा से काफी कम दर्ज हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 1 जून से 18 जून के बीच सामान्य वर्षा की तुलना में लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस अवधि में जहां औसतन 46.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होनी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 28.4 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून अब 25 जून के आसपास प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय हो सकता है।
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खेती-किसानी पर दिखाई देने लगा है। खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे किसान पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक हुई बारिश अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि मानसून की सक्रियता में और देरी होती है तो फसलों की बुवाई का कैलेंडर प्रभावित हो सकता है।
प्रदेश के कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, अलीराजपुर, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन जैसे जिलों में अब तक बेहद कम वर्षा दर्ज की गई है। कई इलाकों में आधा इंच पानी भी नहीं गिर पाया है, जिससे खेत सूखे पड़े हैं और किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं।
हालांकि राजधानी भोपाल सहित इंदौर, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, सतना और सीधी जैसे जिलों में एक से चार इंच तक बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदेशव्यापी कृषि गतिविधियों के लिए यह वर्षा पर्याप्त नहीं कही जा सकती।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियों की सक्रियता पर मानसून की आगे की स्थिति निर्भर करेगी। यदि अगले कुछ दिनों में अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
फिलहाल मानसून की सुस्त चाल ने किसानों के साथ-साथ जल संसाधन और कृषि विभाग की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। आने वाले एक सप्ताह को खरीफ सीजन और प्रदेश की जल स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







