विक्टोरिया अस्पताल में ईओडब्ल्यू की छापेमारी, कई दस्तावेज जब्त स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी जांच के घेरे में
EOW raids Victoria Hospital, seizes several documents; senior health department officials under scrutiny

विक्टोरिया अस्पताल में ईओडब्ल्यू की छापेमारी, कई दस्तावेज जब्त स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी जांच के घेरे में
फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने की शिकायत पर कार्रवाई,
जबलपुर, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की टीम ने गुरुवार (16 अक्टूबर) दोपहर जिला अस्पताल (विक्टोरिया) में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान टीम ने अस्पताल से कई दस्तावेज जब्त किए। डीएसपी स्वर्णजीत सिंह धामी के नेतृत्व में यह जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, विक्टोरिया अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने की शिकायत ईओडब्ल्यू के पास पहुंची थी। इस शिकायत के बाद विभाग की टीम ने अस्पताल प्रशासन से कई बार संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन अधिकारियों की ओर से टालमटोल की जा रही थी।
17 बार पत्र लिखने के बाद भी नहीं मिला जवाब
ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025 के बीच विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को 17 बार पत्र लिखे, लेकिन न तो कोई जवाब दिया गया और न ही मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। इसके बाद सिविल सर्जन की मौजूदगी में गुरुवार को टीम ने अस्पताल पहुंचकर छापेमारी की और फाइलें जब्त कीं। बड़े अफसरों पर आ सकती है आंच
सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी जांच की जद में आ सकते हैं। ईओडब्ल्यू की टीम अब सभी दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, जिससे कई और नाम सामने आ सकते हैं।
फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी का मामला
माना जा रहा है कि विक्टोरिया अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। यह मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठ चुका है। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने आरोप लगाया था कि अस्पताल के एक अधिकारी की शैक्षणिक योग्यता फर्जी है, हालांकि सरकार ने उस समय इस आरोप से इनकार किया था।
1876 में बना था महारानी विक्टोरिया अस्पताल
गौरतलब है कि जबलपुर का यह ऐतिहासिक अस्पताल वर्ष 1876 में महारानी विक्टोरिया के नाम पर बनाया गया था। उस दौर में लाल बिल्डिंग में अंग्रेजों और सफेद बिल्डिंग में भारतीयों का इलाज किया जाता था। वर्तमान में यही भवन जिला अस्पताल के रूप में संचालित है।







