जबलपुरमध्य प्रदेश

फिर शुरू हुई नो-एंट्री में ट्रक-डंपरों की एंट्री, कलेक्टर के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, कुछ दिनों की सख्ती के बाद फिर पुराने हालात

जबलपुर.. शहर में एक बार फिर नो-एंट्री के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। ट्रक और डंपर बेखौफ होकर शहर की मुख्य सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। कुछ दिन पहले प्रशासन और यातायात विभाग द्वारा सख्ती दिखाते हुए नो-एंट्री नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौटते दिखाई दे रहे हैं।

व्यस्त समय में भारी वाहनों से बढ़ रही परेशानी

शहरवासियों का कहना है कि सुबह स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों के समय, वहीं शाम को बाजार और ऑफिस बंद होने के दौरान भारी वाहन मुख्य मार्गों से गुजर रहे हैं। इसके चलते कई प्रमुख चौराहों और सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। लोगों को रोजाना लंबे समय तक जाम में फंसना पड़ रहा है, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

कलेक्टर के आदेशों पर नहीं दिख रहा अमल

प्रशासन द्वारा पूर्व में स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे कि तय समय के दौरान शहर में ट्रक और डंपरों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके बावजूद कई इलाकों में भारी वाहन खुलेआम नो-एंट्री में प्रवेश करते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद कार्रवाई बेहद सीमित दिखाई दे रही है।

कुछ दिनों की कार्रवाई, फिर ढीला पड़ जाता सिस्टम

शहर में चर्चा है कि प्रशासनिक सख्ती केवल कुछ दिनों तक ही दिखाई देती है। शुरुआती दौर में चेकिंग और चालानी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन समय बीतते ही व्यवस्था फिर ढीली पड़ जाती है। यही वजह है कि वाहन चालकों में नियमों का डर खत्म होता नजर आ रहा है और भारी वाहन फिर से शहर की व्यस्त सड़कों पर दौड़ने लगे हैं।

आम जनता की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नो-एंट्री नियम ही प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पा रहे, तो यातायात व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कई नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन को केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लगातार मॉनिटरिंग और सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

आखिर जिम्मेदारी किसकी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों के आदेशों का पालन जमीन पर कौन करवाएगा? यदि इसी तरह नियमों की अनदेखी होती रही तो शहर की यातायात व्यवस्था फिर भगवान भरोसे नजर आएगी। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच नो-एंट्री नियमों का पालन करवाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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