नागपुर के पास मिले कारतूसों को लेकर ओएफके में सनसनी, 40साल पूर्व बने कारतूसों को लेकर अधिकारियों, कर्मचारियों में चर्चा

जबलपुर यश भारत | गत दिवस नागपुर में भारसिंगी में जाम नदी पर बन रहे पुल के पास लावारिश मिले कारतूसों की खबर के बाद ओएफके में अधिकारियों और कर्मचारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है ।सबका यही कहना है कि चार दशक पूर्व ही कारतूसों का निर्माण फैक्ट्री में बंद हो गया है। चूंकि नागपुर पुलिस के अनुसार कारतूसों में ओएफके का निशान है। अतः यहां भी इस संबंध में दस्तावेज आदि खंगाले जा रहे हैं। चूंकि उस समय कम्प्यूटर जैसी सुविधाएं नहीं थी। अतः दस्तावेजों में दर्ज जानकारी कालातीत होने के कारण जानकारी मिलना कठिन ही होगा।
जानकारों का कहना है कि गोला बारूद की एक्सपायरी डेट होती है। अतः चार दशक पूर्व बने कारतूस एक्सपायर हैं। ऐसे में ऐसे बारूद को नष्ट किए जाने की प्रक्रिया है।चाहे वह सेना को इशु किया गया था या नहीं। पुलिस जहां इस मामले में जांच कर रही है। वहीं निर्माणी एक्सपर्ट का मानना है कि उक्त कारतूस विनष्टीकरण के दौरान यहां वहां हुए हैं।
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला सीधे निर्माणी से जुड़ा न होकर या तो विनष्टीकरण के दौरान यहां वहां हुए होंगे या फिर किसी अन्य स्त्रोतों से कबाड़ियों के पास या अन्य किसी के हाथ लगे होंगे । क्योंकि अक्सर कबाड़ के दौरान भी सामान यहां वहां हो जाता है। पिछले दिनों शहर में भी शमीम कबाड़ी के यहां खमरिया के विस्फोट की घटना हुई थी। जिसकी अब भी जांच जारी है।







