थाईलैंड से डिपोर्ट आतंकी मोहसिन गिरफ्तार, हिज्ब-उत- तहरीर के लिए कर रहा था फंडिंग
एनआईए की भोपाल और झालावाड़ में बड़ी कार्रवाई, डिजिटल डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज व साहित्य जब्त

भोपाल। हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़े नेटवर्क पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई की है। थाईलैंड से डिपोर्ट कर भारत लाए गए मोहसिन खान की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने शनिवार को भोपाल और राजस्थान के झालावाड़ में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई डिजिटल डिवाइस, संदिग्ध दस्तावेज और धार्मिक साहित्य जब्त किए गए।
मोहसिन पर आरोप है कि वह आतंकी संगठन हिज्ब-उत- तहरीर के लिए विदेशों से फंड जुटाता था और संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं से देशभर में संपर्क में था। वह लंबे समय से भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में रह रहा था और यहां जेल में बंद हिज्ब-उत- तहरीर के आरोपियों के परिजनों से भी लगातार जुड़ा हुआ था। इन परिवारों को वह आर्थिक मदद भी पहुंचा रहा था।
पुख्ता सबूतों के आधार पर हुआ गिरफ्तार-
एनआईए सूत्रों के अनुसार, 2023 में हिज्ब-उत- तहरीर से जुड़े कई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के दौरान मोहसिन का नाम जांच में आया था। उस समय पर्याप्त सबूत न होने के कारण उसे छोड़ दिया गया, लेकिन एजेंसी ने उस पर निगरानी जारी रखी। अब पुख्ता सबूतों के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है और आज तक रिमांड पर लिया गया है।
खातों में संदिग्ध लेनदेन-
जांच में सामने आया है कि मोहसिन के बैंक खातों में कई संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। उसके मोबाइल से ऐसी ऐप्स भी मिली हैं जो आतंकी संगठन आंतरिक संपर्क के लिए इस्तेमाल करते हैं। जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरण फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
करीबी के घर पर भी एजेंसी ने ली तलाशी-
मोहसिन का करीबी अकरम खान भी एनआईए की रडार पर है, जो भोपाल के ऐशबाग इलाके में रहता है। एजेंसी ने अकरम के घर साढ़े तीन घंटे तक तलाशी की और मोबाइल, दस्तावेज तथा धार्मिक पुस्तकें जब्त कीं। उधर, झालावाड़ में भी दो ठिकानों पर दबिश दी गई है, जहां से डिजिटल सबूत मिले हैं।
एनआईए का कहना है कि हिज्ब-उत- तहरीर का मकसद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर कर शरिया आधारित शासन स्थापित करना है। संगठन बेरोजगार मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलकर हिंसा के लिए उकसा रहा था।







