जबलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शनः नगर निगम मुख्यालय का घेराव, जल संकट और अनियमितताओं पर फूटा गुस्सा

जबलपुर, यशभारत। भ्रष्टाचार और नगर निगम की कथित नाकामियों के खिलाफ कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया, जहां उन्होंने उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर केवल खाने की जुगत में लगे रहने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने शहर में व्याप्त जल संकट, जलभराव की स्थिति, और बुनियादी सुविधाओं में भ्रष्टाचार को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया।
जलभराव और ड्रेनेज सिस्टम में भ्रष्टाचार का आरोप
कांग्रेस नेताओं ं ने शहर में बारिश के दौरान होने वाले भीषण जलभराव पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि जलभराव की स्थिति में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के घरों में कमर तक पानी भर जाता है। प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से एलटी के ड्रेनेज सिस्टम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जिसमें 100 फुट के नाले को 12Û12 फुट कर दिया गया।
हनुमान ताल में करोड़ों के भ्रष्टाचार का दावा
भ्रष्टाचार के खेल का एक और उदाहरण देते हुए, युवाओं ने हनुमान ताल की स्थिति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि हनुमान ताल को पूरी तरह खाली कर दिया गया था, लेकिन कोई सफाई नहीं की गई। अब बारिश का पानी भरने पर यह फिर भर जाएगा, और इस नाम पर कम से कम पांच से दस करोड़ रुपये का गबन कर लिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह से शहर का नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई कोई नहीं करेगा।
जल संकट और नागरिक सुविधाओं की अनदेखी
प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेता इस बात से क्षुब्ध थे कि वे शहर को टैक्स देते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि शहर में 15-15 दिनों तक जलापूर्ति बाधित रहती है, और इस पर नगर निगम के अधिकारियों से लेकर मंत्रियों और महापौर तक की श्निष्ठुरताश् देखने को मिलती है। युवाओं ने आरोप लगाया कि यातायात व्यवस्था भी अस्त-व्यस्त है, और अधिकारी तथा नेता सुविधाओं को तोड़ने और दोबारा पैसा खाने के लिए केवल बात करते हैं, लेकिन वास्तव में कोई सुधार नहीं करते। प्रदर्शनकारी युवाओं ने मांग की कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाए और शहर की मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उनका आंदोलन जारी रहेगा।







