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‘भारत बंद’ से देशभर में असर, 10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को राहुल और किसान संगठनों का समर्थन

कई हिस्सों में सुबह से इसका असर देखने को मिला

नई दिल्ली। 12 फरवरी को 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। देश के कई हिस्सों में सुबह से इसका असर देखने को मिला। कोलकाता और ओडिशा में हड़ताल की स्पष्ट झलक दिखाई दी, जबकि अन्य राज्यों में भी सार्वजनिक परिवहन, बैंकिंग सेवाएं और शैक्षणिक संस्थान प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। बताया जा रहा है कि करीब 30 करोड़ श्रमिक इस बंद में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ट्रेड यूनियनों के आंदोलन का समर्थन किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) समेत कई किसान संगठनों ने हड़ताल को समर्थन दिया है।

इस ‘भारत बंद’ का मुख्य कारण साल 2025 में लागू चार नई श्रम संहिताओं का विरोध है, जिन्होंने 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ली है। ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी में अधिक छूट देती हैं। उनका कहना है कि इससे नौकरी की सुरक्षा कम होगी और असंगठित व ठेका श्रमिकों की स्थिति और कमजोर होगी।

यूनियनों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए हैं, जिसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, सरकारी नौकरियों में कटौती, वेतन वृद्धि न होने और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दे भी हड़ताल के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने, श्रमिकों और किसानों के खिलाफ माने जा रहे प्रस्तावित विधेयकों को निरस्त करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं को मजबूत करने तथा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की मांग शामिल है।

ट्रेड यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल श्रमिकों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन का हिस्सा है।

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