जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप सही पाए गए, संसद में जांच समिति की रिपोर्ट पेश
नई दिल्ली,यशभारत।

नई दिल्ली,यशभारत। जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से नकदी मिलने के मामले में संसद की जांच समिति ने उन पर लगाए गए तीनों आरोपों को सही पाया है। समिति की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई। मामला 14 अगस्त 2025 को उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने से जुड़ा है। जांच समिति के मुताबिक स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों के बंडल और अधजले नोट बड़ी मात्रा में पाए गए थे। जांच के दौरान दमकल और पुलिसकर्मियों ने बताया कि नकदी स्टोररूम के बड़े हिस्से में फैली हुई थी। हालांकि नोटों को जब्त कर उनकी गिनती नहीं की गई, इसलिए समिति यह तय नहीं कर सकी कि कुल कितनी नकदी वहां मौजूद थी।समिति ने यह भी माना कि आग बुझने के बाद स्टोररूम को तत्काल सील नहीं किया गया और वहां से जला हुआ सामान हटाया गया। इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित नहीं रह सके और सबूतों से छेड़छाड़ की स्थिति बनी।
तीसरे आरोप में समिति ने जस्टिस वर्मा के स्पष्टीकरण को अधूरा, टालमटोल वाला और भ्रामक माना। उन्होंने नकदी की जानकारी से इनकार करने के बाद इसे साजिश के तहत रखे जाने की बात कही, लेकिन इसके समर्थन में ठोस साक्ष्य नहीं दिए। समिति के सामने उन्होंने स्वयं गवाही भी नहीं दी।जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया था। समिति की रिपोर्ट अब संसद के समक्ष रखे जाने के बाद मामले में आगे की संवैधानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।







