मध्य प्रदेशराज्य

क्षेत्र वासियों का दर्द: अपनों को रुखसत करने के लिए भी पार करनी पड़ती है ‘उफनती नदी’…. देखें पूरा वीडियो 

सिवनी यश भारत:-किसी अपने को खोने का दुख पहले ही परिवार को तोड़ देता है, लेकिन लखनादौन जनपद की ग्राम पंचायत गणेशगंज के गंजटोला में मुस्लिम समाज के लोगों के लिए अपनों की अंतिम यात्रा भी किसी परीक्षा से कम नहीं है। गांव से कब्रिस्तान तक पहुंचने के लिए मुतिया नदी को पार करना पड़ता है। गर्मी और सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर जनाजा कब्रिस्तान तक पहुंचा देते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में नदी का बढ़ता जलस्तर और तेज बहाव इस सफर को जोखिम भरा बना देता है।

 

ग्रामीणों के मुताबिक बरसात में मुतिया नदी का पानी बढ़ने के बाद जनाजा लेकर नदी पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार पानी का बहाव कम होने का

 

इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में अंतिम संस्कार में भी देरी की स्थिति बन जाती है। परिजनों और समाज के लोगों को एक ओर अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने का

 

ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल या रपटा केवल आवागमन की सुविधा के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह लोगों की बुनियादी जरूरत और मानवीय गरिमा से जुड़ा मामला है। किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा सम्मानपूर्वक और सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके, यह समाज की सामान्य अपेक्षा है। लेकिन यहां बरसात के दिनों में जनाजा लेकर नंदी पार करना लोगों की मजबूरी बन जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मुत्तिया नदी पर जल्द से जल्द पुल अथवा रपटा निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि विकास की बात तभी सार्थक होगी, जब गांव के लोगों को जीवन की सामान्य जरूरतों के साथ-साथ मृत्यु के बाद अंतिम यात्रा के लिए भी सुरक्षित रास्ता मिल सकें।

 

दुख होता है, वहीं दूसरी ओर नदी पार करने की चिंता बनी रहती है। गंजटोला निवासी नईम शाह के निधन के बाद भी ऐसी ही स्थिति सामने आई। नईम शाह के जनाजे को कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए लोगों को मुतिया नदी पार करनी पड़ी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद गांव की वर्षों पुरानी समस्या एक बार फिर चर्चा में आ गई।

 

गांव के मतीन खान, फईम मोहम्मद, इरफान खान, शोहेल खान और शमीम खान ने बताया कि मुतिया नदी पर पुल या रपटा निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार समस्या जिम्मेदारों के सामने रखी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

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