वर्दी से इंसाफ तक की जंग की दास्तान है ‘अखाड़ा’, – भोपाल में हुआ पुस्तक का विमोचन

वर्दी से इंसाफ तक की जंग की दास्तान है ‘अखाड़ा’,
– भोपाल में हुआ पुस्तक का विमोचन
भोपाल, यश भारत। अपराध से सीधी टक्कर, कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और इंसाफ की तलाश में सामने आए संघर्षों को शब्दों में पिरोती पुस्तक ‘अखाड़ा’ का रविवार को भोपाल में विमोचन हुआ। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहे सलीम खान के जीवन और पुलिस सेवा के अनुभवों पर आधारित इस पुस्तक का विमोचन बैरागढ़ स्थित चिरायु मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित समारोह में किया गया।
प्रसिद्ध पटकथा लेखक एवं फिल्म निर्देशक रूमी जाफरी समारोह के मुख्य अतिथि रहे। पुस्तक के लेखक सिब्तैन शाहिदी ने ‘अखाड़ा’ के लेखन की पृष्ठभूमि और सलीम खान के सार्वजनिक जीवन से जुड़े उन अनुभवों को सामने रखा, जिन्हें पुस्तक में जगह दी गई है।
पुलिस की नौकरी नहीं, संघर्षों की पूरी कहानी
‘अखाड़ा’ में सलीम खान के पुलिस अधिकारी के रूप में कार्यकाल को केवल घटनाओं के सिलसिले के तौर पर नहीं देखा गया है, बल्कि उन परिस्थितियों और फैसलों को भी सामने लाया गया है, जिनसे एक पुलिस अधिकारी को अपनी ड्यूटी के दौरान गुजरना पड़ता है। अपराधियों से मुकाबला, कानून-व्यवस्था की चुनौती और न्याय के लिए किए गए प्रयास पुस्तक के प्रमुख हिस्से हैं।
लेखक ने सलीम खान के जीवन से जुड़े संस्मरणों और अनुभवों को भी पुस्तक में शामिल किया है। इन प्रसंगों के जरिए पुलिस सेवा के मानवीय पक्ष, दबाव, चुनौतियों और फैसलों के पीछे छिपे संघर्ष को समझने की कोशिश की गई है।
न्याय व्यवस्था के नैतिक सवाल भी उठाती है पुस्तक
पुस्तक की खासियत यह है कि इसमें पुलिस व्यवस्था और अपराध के बीच संघर्ष के साथ-साथ न्याय के मानवीय और नैतिक पक्ष को भी सामने रखा गया है। सलीम खान के अनुभवों के जरिए यह सवाल भी उभरता है कि कानून को लागू करते समय परिस्थितियों, इंसानी संवेदनाओं और न्याय के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।
लेखक ने साझा की लेखन यात्रा
विमोचन समारोह में लेखक सिब्तैन शाहिदी ने पुस्तक तैयार करने के दौरान जुटाए गए अनुभवों और सामग्री से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सलीम खान के सार्वजनिक जीवन और पुलिस सेवा से जुड़े अनुभवों को पुस्तक का स्वरूप देने के पीछे उनका उद्देश्य एक ऐसे जीवन संघर्ष को पाठकों तक पहुंचाना रहा, जिसमें अपराध के खिलाफ लड़ाई के साथ इंसाफ की जद्दोजहद भी लगातार चलती रही।
समारोह में उपस्थित लोगों ने पुस्तक के विषय और प्रस्तुति को लेकर चर्चा की। ‘अखाड़ा’ अब पाठकों के सामने एक ऐसे पुलिस अधिकारी की जीवन यात्रा लेकर आई है, जिसमें वर्दी की जिम्मेदारी, अपराध से मुकाबला और इंसाफ की तलाश—तीनों एक साथ दिखाई देते हैं।







