नर्मदा संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना पर रविंद्र भवन में हुआ व्यापक मंथन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्री, जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी हुए शामिल

नर्मदा संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना पर रविंद्र भवन में हुआ व्यापक मंथन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्री, जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी हुए शामिल
भोपाल, यश भारत। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित रविंद्र भवन में अवधूत सिद्ध महायोगी दादागुरु के सान्निध्य में नर्मदा मिशन द्वारा आयोजित नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी श्रद्धा आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक सरोकारों के वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्री प्रहलाद पटेल मंत्री मंत्री विश्वास सारंग पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी पर्यावरणविद शिक्षाविद एवं धर्माचार्य उपस्थित रहे। संगोष्ठी में मां नर्मदा के संरक्षण संवर्धन और सांस्कृतिक महत्व को लेकर गंभीर मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति सभ्यता आस्था और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। नर्मदा तटों पर सदियों से आध्यात्मिक परंपराएं विकसित हुई हैं और यह नदी मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों की जीवनरेखा मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि नर्मदा केवल जलधारा नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान है। इसके संरक्षण के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और समृद्ध नर्मदा सौंपना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान नदी प्रदूषण जल स्रोतों के घटते स्तर और पर्यावरणीय असंतुलन जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नदियों के संरक्षण को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं। इस दौरान जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और नदी स्वच्छता अभियान को जनआंदोलन का रूप देने पर विशेष बल दिया गया। अवधूत सिद्ध महायोगी दादागुरु ने अपने आशीर्वचन में कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं होतीं बल्कि वे संस्कृति चेतना और जीवन की वाहक होती हैं। मां नर्मदा की सेवा और संरक्षण मानवता की सेवा के समान है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण के लिए आगे आने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। संगोष्ठी में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने नर्मदा तटों की स्वच्छता बनाए रखने प्लास्टिक उपयोग को कम करने और जनसहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में नर्मदा संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों और जनजागरूकता गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रम का समापन मां नर्मदा की आरती भजन एवं दादागुरु के आशीर्वचन के साथ हुआ। आयोजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों में नर्मदा संरक्षण के प्रति विशेष उत्साह और जागरूकता देखने को मिली।







