सुपरफास्ट का तमगा, लेकिन रफ्तार में निकलीं फिसड्डी,यात्रियों की जेब पर पड़ रहा था अतिरिक्त किराये का बोझ

(किशोर गौतम)
जबलपुर यशभारत। सुपरफास्ट का दर्जा हासिल कर यात्रियों से अतिरिक्त किराया वसूलने वाली ट्रेनों की हकीकत रेलवे के निर्धारित गति मानक में सामने आ गई है। पश्चिम मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली 8 ट्रेनें ऐसी हैं जो निर्धारित 55 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं। इसके बावजूद इन ट्रेनों का संचालन सुपरफास्ट श्रेणी में किया जा रहा था।अब रेलवे ने इनकी श्रेणी में बदलाव की तैयारी की है। सुपरफास्ट का दर्जा समाप्त होने के बाद ये ट्रेनें मेल-एक्सप्रेस के रूप में पटरी पर दौड़ेंगी। इससे यात्रियों को सुपरफास्ट के नाम पर लगने वाले अतिरिक्त किराये से राहत मिलने की उम्मीद है।*
उल्लेखनीय है कि रेलवे में सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा केवल नाम या पहचान तक सीमित नहीं होता बल्कि इसके साथ यात्रियों को तेज सफर की उम्मीद भी रहती है। यात्री इस भरोसे से सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट खरीदते हैं कि उन्हें सामान्य मेल-एक्सप्रेस की तुलना में कम समय में गंतव्य तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। लेकिन जब ट्रेन की औसत रफ्तार ही निर्धारित मानक से नीचे रहे तो सुपरफास्ट का तमगा यात्रियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। पश्चिम मध्य रेलवे से गुजरने वाली 8 ट्रेनों के मामले में कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आई है।
औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक होना जरूरी
रेलवे के निर्धारित मानकों के अनुसार सुपरफास्ट श्रेणी में शामिल होने के लिए ट्रेन की औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक होना जरूरी है। इसके आधार पर ट्रेनों की श्रेणी तय की जाती है। पमरे के दायरे से गुजरने वाली 8 ट्रेनें इस निर्धारित गति के पैमाने पर खरी नहीं उतर सकीं। इनका वास्तविक परिचालन औसत निर्धारित मानक से कम पाया गया। ऐसे में इन ट्रेनों को सुपरफास्ट श्रेणी में बनाए रखने का औचित्य नहीं रह गया है। इसी के चलते अब इन्हें सुपरफास्ट की सूची से हटाकर मेल-एक्सप्रेस श्रेणी में शामिल किया जा रहा है।
यह गाडियां चलेंगीं मेल एक्सप्रेस बनकर
1) 22177/22178 मुंबई – बनारस महानगरी एक्सप्रेस (अब मेल एक्सप्रेस नम्बर 11093/11094)
2) 22129/22130 एलएलटी – अयोध्या तुलसी एक्सप्रेस (अब मेल एक्सप्रेस 11065/11066)
3) 22167/22168 एलएलटी – बनारस सुपरफास्ट एक्सप्रेस (अब मेल एक्सप्रेस 11067/11068)
4) 12779/12780 वास्को डी गामा – निजामुद्दीन गोवा एक्सप्रेस (अब मेल एक्सप्रेस 17379/17380)
नाम सुपरफास्ट, लेकिन सफर में नहीं दिखी तेजी
रेलवे की इस कवायद ने ट्रेनों की वास्तविक रफ्तार और उनके नाम के बीच अंतर को उजागर किया है। सुपरफास्ट का दर्जा मिलने के बाद यात्रियों से सामान्य मेल-एक्सप्रेस की तुलना में अतिरिक्त सुपरफास्ट शुल्क लिया जाता है। ऐसे में यात्रियों की अपेक्षा रहती है कि ट्रेन की गति और यात्रा समय भी उसी अनुरूप हो। लेकिन जिन ट्रेनों की औसत रफ्तार 55 किलोमीटर प्रति घंटे के निर्धारित मानक तक नहीं पहुंच पा रही थी, उनमें सुपरफास्ट का दर्जा यात्रियों के लिए सवाल खड़े कर रहा था।
अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ती थी
रेलवे के इस फैसले से उन यात्रियों को सीधा फायदा मिलने की संभावना है, जो नियमित रूप से इन ट्रेनों में सफर करते हैं। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान सुपरफास्ट शुल्क के रूप में अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ती थी। श्रेणी बदलने के बाद इस अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सकती है।
यात्रियों को किराये में मिलेगी राहत
ट्रेनों की श्रेणी में बदलाव का सबसे बड़ा असर किराये पर पड़ने की संभावना है। सुपरफास्ट ट्रेनों में निर्धारित अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, जबकि मेल-एक्सप्रेस श्रेणी में यह शुल्क लागू नहीं होता। ऐसे में सुपरफास्ट से मेल-एक्सप्रेस बनने वाली ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को टिकट की कीमत में अंतर देखने को मिल सकता है। हालांकि वास्तविक किराया कितना कम होगा, यह संबंधित रेलवे आदेश और नई किराया व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
रफ्तार के आधार पर श्रेणी तय करने की कवायद
रेलवे में ट्रेनों की श्रेणी का निर्धारण परिचालन संबंधी मानकों के आधार पर किया जाता है। किसी ट्रेन को सुपरफास्ट का दर्जा देने के पीछे उसकी औसत गति और संचालन क्षमता महत्वपूर्ण होती है। यदि ट्रेन निर्धारित गति हासिल नहीं कर पाती तो उसकी श्रेणी की समीक्षा की जाती है। पमरे से गुजरने वाली 8 ट्रेनों को सुपरफास्ट सूची से बाहर करने का निर्णय भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इस बदलाव के बाद इन ट्रेनों की पहचान सुपरफास्ट के बजाय मेल-एक्सप्रेस के रूप में होगी। हालांकि श्रेणी बदलने का मतलब यह नहीं है कि ट्रेन के ठहराव, मार्ग या समय-सारिणी में भी तत्काल बदलाव होगा। इन पहलुओं पर रेलवे के अलग-अलग परिचालन आदेश लागू होंगे।
यात्रियों के लिए राहत, रेलवे के लिए व्यवस्था में सुधार
रेलवे के इस कदम को यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क और ट्रेन की वास्तविक परिचालन क्षमता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से यात्रियों की यह अपेक्षा रहती है कि जिस श्रेणी का किराया उनसे लिया जाए, सुविधाओं और यात्रा समय के मामले में भी उन्हें उसी के अनुरूप अनुभव मिले। अब भारतीय रेलवे में 24 ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त होने से कम से कम किराये के मामले में यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं रेलवे के सामने चुनौती यह भी रहेगी कि ट्रेनों की समयपालन स्थिति और औसत रफ्तार में सुधार किया जाए, ताकि यात्रियों को बेहतर रेल यात्रा का अनुभव मिल सके।







