धागा, शैडो और दस्ताना शैली में जीवंत हुईं सीतायन और कर्ण कथा 25 से अधिक कठपुतलियों से सजी प्रस्तुति, शिविर और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी भी आकर्षण

धागा, शैडो और दस्ताना शैली में जीवंत हुईं सीतायन और कर्ण कथा
25 से अधिक कठपुतलियों से सजी प्रस्तुति, शिविर और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी भी आकर्षण
भोपाल यश भारत। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित चार दिवसीय पुतुल समारोह में शनिवार को धागा शैडो और दस्ताना कठपुतली शैलियों के माध्यम से सीतायन प्रसंग और कर्ण कथा का प्रभावशाली मंचन किया गया। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली और डॉल्स थिएटर कोलकाता के सहयोग से आयोजित समारोह में श्री बालकृष्ण गणपत मसगे एवं साथी सिंधुदुर्ग के कलाकारों ने भारतीय महाकाव्यों के प्रसंगों को जीवंत किया। धागा कठपुतलियों की सधी गतिविधियों शैडो शैली में प्रकाश-छाया के संयोजन और दस्ताना कठपुतलियों के हाव-भाव ने दर्शकों को आकर्षित किया। सीतायन में रामायण के भावनात्मक प्रसंगों जबकि कर्ण कथा में संघर्ष दानशीलता और निष्ठा को प्रस्तुत किया गया। मंचन में आठ कलाकारों ने सहभागिता की और 25 से अधिक कठपुतलियों का उपयोग किया गया। कलाकारों का स्वागत सहायक निदेशक राजीव सक्सेना ने किया।
शिविर और प्रदर्शनी भी आकर्षण
समारोह में सुदीप गुप्ता एवं साथी, कोलकाता द्वारा कठपुतली निर्माण और प्रदर्शन तकनीक का शिविर आयोजित किया जा रहा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में 100 से अधिक भारतीय और विदेशी कठपुतलियां प्रदर्शित हैं।समारोह का समापन रविवार को छड़ और धागा शैली में धनुर्धर एकांकी के मंचन के साथ होगा।







