मां बूढ़ी खेरमाई जिन्हें लगते हैं कच्ची पंगत के भोग, 13 सौ वर्ष प्राचीन है बूढ़ी खेरमाई धूमावती शक्तिपीठ

जबलपुर यश भारत। बोलो महुआ महारानी की जय, महामारी माई की जय,खप्पर वाली की जय,खेरापति की जय, बूढ़ी खेरमाई वृद्ध माता की जय आदि जयकारे आदि कुछ अलग नहीं गोड़वाना कालीन परंपरा में 13 सौ वर्ष पूर्व से चली आ रही भगवती की तांत्रिक पूजा का अंश है। जहां पूजा में माता को सात्विक भोजन का कच्ची पंगत में परोसे जाने वाले रोटी चांवल, कढ़ी,दाल, भजिया, मंगौड़े,बरा, गुलगुला आदि का भोग लगा कर भक्तों को परोसा जाता है। जिन्हें भक्ति बढ़ी श्रद्धा से पंगत में बैठकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
चार खंबा गोहलपुर में स्थित मां बूढ़ी खेरमाई धूमावती शक्तिपीठ की स्थापना 13 सौ वर्ष पूर्व गौंड शासन के प्रारंभ में हुई थी। जिन्हें गौड़ राजाओं ने अपनी प्रजा को महामारी से बचाव और राज्य की सुख समृद्धि के लिए की थी। किंवदंती है कि मां बूढ़ी खेरमाई तत्कालीन राजा को सपना देकर स्वयं प्रकट हुई थी। गौड़ शासन के बाद मराठा पेशवाओं ने अपने राजकाज की शुरुआत नये स्थान वर्तमान बड़ा फुहारा, कमानिया गेट ,दिक्षितपुरा,भालदार पुरा आदि से संचालित की। उसके बाद अंग्रेजों के आने के बाद भले ही बूढ़ी खेरमाई क्षेत्र उपेक्षित सा हो गया लेकिन साधकों भक्तों के परिवार से वहां पूजा पाठ, साधना निरंतर जारी रही। ट्रस्टियों के अनुसार एक सदी पूर्व से पुनः पीठ में पूजा आराधना का क्रम जो शुरू हुआ।7 दशक पूर्व स्व. विजय पंडा ने शहर के गणमान्यों के साथ इसे भव्य रूप देने का बीड़ा उठाया जो अब लगातार वृहद भव्यता का रूप लेता जा रहा है।
बताया जाता है कि यहां चारों नवरात्रियों पर विशेष रूप से तंत्र साधना होती है। ट्रस्टियों पंडित रोहित दुबे, पूर्व पार्षद दिनेश राठौर, सौरभ दुबे, ब्रजबिहारी नागरिया , प्रशांत गुप्ता, दिलीप दुबे आदि के अनुसार यहां देश के अनेक हिस्सों से तंत्र साधक आते हैं। यहां तक कि सीमा पर तैनात भारतीय जवान भी देश की दुश्मनों से रक्षा हेतु भगवती से छोली फैला कर आशीर्वाद मांगते हैं। कोई नौ दिन, तो कोई एक दिन और कभी साल में जब छुट्टी मिलती है हाजिरी लगाते हैं। मंदिर के पुजारी राजू महराज के अनुसार यहां नियमित दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ भगवती के अवतरण पर्व पर होने वाले उत्सव में शहर के विभिन्न हिस्सों से पालकी आती हैं।मठ के साधक और पंडा दीपक यादव,पदम गुप्ता,सावन साहू, गौरव सोनी ने बताया कि मां की पूजा आराधना के लिए विशेष नियमों को ध्यान में रखना पड़ता है।गर्भ गृह में पुजारी और पंडा के अलावा सबका प्रवेश वर्जित होता है। नवरात्रि में यहां दिन रात भक्तों की एक सी भीड़ बनी रहती है। संवेदनशील क्षेत्र होने से पुलिस और प्रशासन की 24 घंटे सशस्त्र बलों के साथ विशेष व्यवस्था रहती है। व्यवस्था का यह क्रम पूरे वर्ष बना रहता है और अधिकारी सतत दौरा करते रहते हैं।







