न खिड़की, न पानी, सिर्फ अफसरों की मनमानी : अधूरे भवन में संचालित हो रहा छात्रावास

यशभारत, डिंडोरी । डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड अंतर्गत गोपालपुर में संचालित राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह बालक छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि छात्रावास भवन का निर्माण कार्य पूरा हुए बिना ही यहां बच्चों को रखकर छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। भवन में खिड़कियां अधूरी होने और पानी की सप्लाई की व्यवस्था पूरी नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं, निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, छात्रावास भवन का निर्माण पीआईयू विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से कराया जा रहा है। भवन निर्माण का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति को लेकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। यदि भवन में आवश्यक कार्य अधूरे हैं, तो ऐसे में छात्रावास का संचालन शुरू करने से पहले बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल
छात्रावास भवन में खिड़कियों का काम अधूरा होने और पानी की आपूर्ति की व्यवस्था पूरी नहीं होने की शिकायतों के बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग भी उठ रही है। सरकारी भवनों का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार होना चाहिए। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा निर्माण कार्य का निरीक्षण कर कमियों की पहचान करना और उन्हें दूर कराना आवश्यक है।
निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने का आरोप
भवन निर्माण को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निर्माण स्थल पर स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य की समय-सीमा और अन्य जरूरी विवरण दर्शाने वाला सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। भवन की डिजाइन और निर्माण से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की गई है। ऐसे में निर्माण कार्य की लागत, निर्धारित मानकों और प्रगति के संबंध में जानकारी प्राप्त करना स्थानीय लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की अपेक्षा
मामले में सवाल उठता है कि भवन का निर्माण कार्य पूरा होने से पहले छात्रावास का संचालन क्यों शुरू किया गया? क्या भवन का तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा संबंधी परीक्षण कराया गया है? पानी की आपूर्ति सहित अन्य अधूरे कार्य कब तक पूरे होंगे? निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करेगा?
अब जरूरत है कि पीआईयू विभाग के अधिकारी और छात्रावास प्रबंधन भवन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और अधूरे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण और जरूरी सुविधाएं मिल सकें। छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े इस मामले में प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण है।







