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*इटारसी-मानिकपुर तीसरी लाइन का सर्वे पूरा, अब मंजूरी का इंतजार,स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा निर्माण, तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य;*

*एक किलोमीटर में रेल लाइन बिछाने में खर्च होते हैं 15 करोड़ रुपए,500 किमी के रेलखंड पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार और परिचालन क्षमता*

जबलपुर यशभारत। पश्चिम मध्य रेल के इटारसी से मानिकपुर के बीच तीसरी रेल लाइन बिछाने की बहुप्रतीक्षित योजना अब एक कदम और आगे बढ़ गई है। करीब 500 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड का सर्वे कार्य पूरा कर लिया गया है। अब परियोजना की स्वीकृति का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही तीसरी रेल लाइन के निर्माण का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।
परियोजना को करीब तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरी लाइन बनने के बाद इस पूरे रेलखंड पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा रेल लाइनों पर ट्रेनों के दबाव को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।

500 किलोमीटर लंबे रेलखंड को मिलेगा तीसरा ट्रैक*

इटारसी से मानिकपुर के बीच करीब 500 किलोमीटर की दूरी में तीसरी रेल लाइन विकसित की जानी है। यह रेलखंड महत्वपूर्ण रेल मार्गों में शामिल है। इस मार्ग से बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां गुजरती हैं। वर्तमान में दो रेल लाइनों पर बढ़ते यातायात के कारण कई बार ट्रेनों के संचालन में दबाव की स्थिति बनती है। तीसरा ट्रैक उपलब्ध होने के बाद रेलवे को ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।

*एक किलोमीटर लाइन पर 15 से 20 करोड़ तक खर्च*

परियोजना की लागत भी काफी बड़ी होगी। अनुमान के मुताबिक एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाने में करीब 15 से 20 करोड़ रुपए तक का खर्च आएगा। 500 किलोमीटर के पूरे रेलखंड को देखते हुए परियोजना पर हजारों करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें रेल लाइन के साथ आवश्यक तकनीकी कार्य, सिग्नलिंग और अन्य रेलवे अधोसंरचना को विकसित करने का काम भी शामिल होगा।

ट्रेनों को नहीं करना पड़ेगा लंबे इंतजार*

तीसरी लाइन का सबसे बड़ा फायदा ट्रेनों के परिचालन में देखने को मिलेगा। वर्तमान में दो लाइनों पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी संचालन होता है। किसी एक ट्रेन को प्राथमिकता देने या दूसरी ट्रेन को निकालने के लिए कई बार दूसरी ट्रेन को रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों को अलग-अलग ट्रैक पर संचालित करने में रेलवे को अधिक सुविधा मिलेगी। इससे ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव में कमी आने की उम्मीद है।

*बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार*

तीसरी लाइन बनने के बाद केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने में ही मदद नहीं मिलेगी बल्कि परिचालन को अधिक व्यवस्थित करने का रास्ता भी साफ होगा। अतिरिक्त ट्रैक मिलने से ट्रेनों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इसका सीधा असर ट्रेनों की औसत रफ्तार पर पड़ने की उम्मीद है। लंबे समय तक क्रॉसिंग या लाइन क्लियर होने की प्रतीक्षा कम होने से यात्रियों के समय की भी बचत होगी।

मालगाड़ियों के लिए भी बड़ी राहत*

इटारसी-मानिकपुर रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी महत्वपूर्ण संचालन होता है। तीसरी लाइन बनने से मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे माल परिवहन को गति मिलने के साथ रेलवे के व्यस्त रेलखंड पर *यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी* मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है।

जबलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

इटारसी-मानिकपुर रेलखंड का महत्व जबलपुर क्षेत्र के लिए भी काफी अधिक है। इस मार्ग से गुजरने वाली कई यात्री और लंबी दूरी की ट्रेनें जबलपुर से होकर संचालित होती हैं। तीसरी लाइन तैयार होने के बाद ट्रेनों के संचालन में सुधार होने पर जबलपुर और आसपास के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सकता है। भविष्य में इस रेलखंड पर नई ट्रेनों के संचालन अथवा मौजूदा ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।

*तीन साल में काम पूरा करने की तैयारी*

इस संबंध में रेलवे सूत्रों के मुताबिक सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब परियोजना की स्वीकृति महत्वपूर्ण चरण है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लक्ष्य करीब तीन साल में तीसरी लाइन का काम पूरा करने का है। यदि काम तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में इटारसी से मानिकपुर के बीच रेल यातायात की तस्वीर बदल सकती है।

*रेल यातायात का दबाव कम करना बड़ी चुनौती*

इटारसी-मानिकपुर रेलखंड पर लगातार बढ़ते यातायात को देखते हुए अतिरिक्त रेल लाइन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। दो लाइनों पर यात्री और मालगाड़ियों का दबाव बढ़ने से परिचालन प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। तीसरी लाइन इस दबाव को कम करने के साथ रेलवे को भविष्य के बढ़ते यातायात के लिए भी तैयार करेगी। यही वजह है कि इस परियोजना को रेल परिचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होने के साथ इटारसी-मानिकपुर के 500 किलोमीटर लंबे रेलखंड को तीसरे ट्रैक की सौगात मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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