फर्जी मार्कशीट से पोस्ट ऑफिस में पाई नौकरी, सीबीआई ने तीन कर्मचारियों को किया गिरफ्तार, डाक विभाग ने किया बर्खास्त

कटनी, यशभारत। डाक विभाग की ग्रामीण डाक सेवा भर्ती में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी करने वाले 8 कर्मचारियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसमे तीन कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें कटनी जिले के विभिन्न उप डाकघरों में पदस्थ किया गया था। इन सभी आठों कर्मचारियों को डाक विभाग ने तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक जनवरी 2024 और जुलाई 2024 में ग्रामीण डाक सेवक पदों के लिए निकली ऑनलाइन भर्ती में अभ्यर्थियों ने अपनी 10वीं की सेल्फ अटेस्टेड अंकसूचियां पोर्टल पर अपलोड की थीं। भौतिक सत्यापन में इसकी खुल गई। नौकरी मिलने और पोस्टिंग हो जाने के बाद जब डाक विभाग ने संबंधित बोड्र्स से इन अंकसूचियों का भौतिक सत्यापन कराया तो वे पूरी तरह जाली निकलीं। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सहायक अधीक्षक डाकघर उपसंभाग क्रमांक 1 की शिकायत पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर सभी 8 आरोपियों को अपनी हिरासत में ले लिया।
बिहार, जम्मू एंड कश्मीर और राज्य ओपन की फर्जी डिग्री
कटनी जिले के विभिन्न उप डाकघरों में पदस्थ इन तीन आरोपियों ने देश के अलग-अलग राज्यों के शिक्षा बोर्डों के नाम से फर्जी अंकसूचियां तैयार करवाई थीं। जिसमे कटनी जिले के उप डाकघरों में तैनात तीन आरोपियों में से रमाकांत शर्मा निवासी मुरैना ने मोहतरा उप डाकघर के लिए बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की जाली अंकसूची दी थी। उमरियापान उप डाकघर में पदस्थ देवेन्द्र सिंह चौहान निवासी देवास ने जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन और संसारपुर उप डाकघर में पदस्थ बद्री प्रसाद यादव निवासी टीकमगढ़ ने मध्यप्रदेश राज्य ओपन की फर्जी मार्कशीट के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक पद पर नियुक्ति पाई थी। विभागीय सत्यापन में इन सभी बोड्र्स से अंकसूचियां फर्जी प्रमाणित होने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई कर इन सभी को गिरफ्तार कर लिया है।
कहीं गिरोह तो सक्रिय नहीं
सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्जी अंकसूची को बनाने और बेचने वाले रैकेट का जाल कई राज्यों में फैला है। बिहार स्कूल एग्जामिनेशन, मध्यप्रदेश राज्य ओपन, जम्मू कश्मीर स्टेट ओपन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल जैसे मान्यता प्राप्त बोर्ड की नकली मार्कशीट तैयार कर अभ्यर्थियों को हजारों रुपये में बेची जाती थीं। सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि इन आरोपियों ने फर्जी मार्कशीट किसी गिरोह या बिचौलिए के माध्यम से बनवाई थी।







