कुर्सी वही, सिर्फ बदला पदनाम, अब रिटायर्ड होने वालों को साधने की जुगत

यश भारत, भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रदेश शासन द्वारा प्रशासनिक तंत्र को खुश करने के नाम पर जुलाई में बांटे गए ‘प्रमोशन’ महज एक कागजी छलावा बनकर रह गए हैं। लगभग एक लाख अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का तोहफा तो दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि न तो उनका कमरा बदला, न मेज और न ही जिम्मेदारी। अफसर कल तक जिस कुर्सी पर बैठकर फाइलें निपटा रहे थे, आज भी उसी जगह जमे हुए हैं। बदलाव के नाम पर सिर्फ उनका ‘पदनाम’ बदला, जबकि वास्तविक पद स्थापना और लाभ का इंतजार अब भी बरकरार है।
इस आधे-अधूरे प्रमोशन के बाद अब सरकार रिटायरमेंट के मुहाने पर खड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को साधने की नई कसरत में जुट गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे कर्मियों की डीपीसी (DPC) कराई जाए जिनका रिटायरमेंट 1 से 2 साल में होने वाला है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पहला चरण ही कागजों तक सीमित रहा, तब नई कवायद से क्या हासिल होगा? पुराना दर्द दूर हुआ नहीं, और सरकार अब नई झुनझुनी थमाने की तैयारी में है।
पदोन्नति का सच
प्रमोशन का कागजी आंकड़ाः जुलाई से अब तक तकरीबन 1 लाख अधिकारियों व कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश जारी।
अब भी अटका भविष्यः करीब 50 हजार से अधिक कर्मचारियों का प्रमोशन किसी न किसी वजह से अब भी पेंडिंग।
शिक्षा विभाग सबसे पीछेः अकेले शिक्षा विभाग में लगभग 30 हजार शिक्षकों का प्रमोशन अटका हुआ है।
दूसरे चरण का दांवः जनवरी 2027 से दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी, जिनमें 1-2 साल में रिटायर्ड होने वालों को प्राथमिकता का दावा।
गजब की आकड़े बाजी
नाम का प्रमोशन, काम वहीः ग्रेड-2 से डिप्टी सेक्रेटरी और ईई से सीई तक पदनाम तो बदले, लेकिन जिम्मेदारियों और कुर्सियों में कोई बदलाव नहीं आया।
जीएडी से 2 दिन में मांगे आंकड़ेः शासन ने सामान्य प्रशासन विभाग से पूछा है कि किस विभाग में कितने प्रमोशन हुए और कितनों के रुके हैं।
कानूनी पेच का बहानाः 2016 से अटके प्रमोशन विवाद का स्थायी समाधान निकालने के बजाय केवल कामचलाऊ व्यवस्था बनाई गई।







