दिव्यांग चयनित प्राथमिक शिक्षकों ने नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग की कहा- सत्यापन पूरा होने के बावजूद रोके आदेश, दोबारा जांच के नाम पर मानसिक और आर्थिक परेशानी , वीडियो देखें

दिव्यांग चयनित प्राथमिक शिक्षकों ने नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग की
कहा- सत्यापन पूरा होने के बावजूद रोके आदेश, दोबारा जांच के नाम पर मानसिक और आर्थिक परेशानी
भोपाल यश भारत । प्राथमिक शिक्षक भर्ती में चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त को पत्र भेजकर नियुक्ति आदेश तत्काल जारी करने की मांग की है। अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया में भेदभाव और दोबारा दिव्यांगता परीक्षण के नाम पर मानसिक एवं प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड समेत आवश्यक दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन पहले ही पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, ये प्रमाण पत्र जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किए गए हैं और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा भी सत्यापन कराया जा चुका है।
गैर-दिव्यांग अभ्यर्थियों के आदेश जारी, दिव्यांगों के रोके
पत्र में आरोप लगाया गया है कि इसी भर्ती प्रक्रिया में अन्य गैर-दिव्यांग अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं, जबकि दिव्यांग अभ्यर्थियों के आदेश रोक दिए गए हैं। अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया है कि इसी संयुक्त भर्ती प्रक्रिया के तहत आदिम जाति कल्याण विभाग में चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों को बिना अतिरिक्त दिव्यांगता परीक्षण के नियुक्ति दी गई है। उन्होंने इसे दोहरी नीति बताते हुए समानता के अधिकार से जोड़कर शिकायत दर्ज कराई है।
दोबारा जांच के लिए अस्पतालों के चक्कर
अभ्यर्थियों के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा दिव्यांगता के पुनः परीक्षण के लिए उन्हें जय प्रकाश अस्पताल भेजा जा रहा है। वहां से कुछ अभ्यर्थियों को एम्स भोपाल और अन्य अस्पतालों में रेफर किए जाने की बात कही गई है। पत्र में दावा किया गया है कि कई जगह जांच के लिए एक से तीन महीने तक का समय दिया जा रहा है या जांच उपकरण खराब होने की जानकारी दी जा रही है। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हो रही है।

मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग
अभ्यर्थियों ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPWD Act) और मानवाधिकारों का हवाला देते हुए कहा है कि बार-बार जांच के कारण उन्हें मानसिक तनाव, शारीरिक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सुदूर जिलों से भोपाल आने-जाने में दिव्यांग अभ्यर्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि पुनः दिव्यांगता परीक्षण की प्रक्रिया में तत्काल शिथिलता दी जाए और चयनित सभी दिव्यांग अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश तत्काल जारी किए जाएं।







