ये खबर आपने पढ़ी….पाकिस्तान में कहां-कहां हैं हिंदू मंदिर? हिंगलाज माता से पंचमुखी हनुमान तक 5 प्राचीन तीर्थों की कहानी
पंचमुखी हनुमान मंदिर: कराची में आस्था का प्रमुख केंद्र

नई दिल्ली, यश भारत। पाकिस्तान का नाम आते ही आमतौर पर इस्लामिक देश की छवि सामने आती है, लेकिन वहां हिंदू धर्म से जुड़े कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल आज भी मौजूद हैं। इनमें कुछ मंदिरों का इतिहास सदियों पुराना बताया जाता है, जबकि कुछ स्थलों का संबंध हिंदू धर्म की प्रमुख धार्मिक मान्यताओं और शक्तिपीठ परंपरा से जुड़ा है। बलूचिस्तान के हिंगलाज माता मंदिर से लेकर कराची के पंचमुखी हनुमान मंदिर तक ये धार्मिक स्थल पाकिस्तान की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा हैं।

हिंगलाज माता मंदिर: गुफा में विराजमान हैं माता
बलूचिस्तान प्रांत में स्थित हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान के प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में गिना जाता है। यह एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है और हिंदू धर्म की शक्तिपीठ परंपरा से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां माता सती का मस्तक गिरा था। हर वर्ष यहां हिंगलाज यात्रा आयोजित होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। हिंगलाज माता मंदिर को लेकर विभिन्न धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। मंदिर की भौगोलिक स्थिति भी इसे दूसरे धार्मिक स्थलों से अलग बनाती है।

कटास राज: झील के आसपास बने मंदिरों का समूह
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटास राज मंदिर कई हिंदू मंदिरों का समूह है। ये मंदिर एक पवित्र झील के आसपास बने हुए हैं। हिंदू धार्मिक मान्यता में इस स्थान का संबंध भगवान शिव से जोड़ा जाता है। कटास राज का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व लंबे समय से बना हुआ है। भारत से भी श्रद्धालु विशेष अवसरों पर यहां पहुंचते रहे हैं। वर्ष 2024 में महाशिवरात्रि के अवसर पर भारत से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए 112 वीजा जारी किए गए थे।

कालका गुफा मंदिर: पहाड़ियों के बीच धार्मिक स्थल
सिंध प्रांत के अरोड़ा क्षेत्र की कालका पहाड़ियों में स्थित कालका गुफा मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के भीतर बना धार्मिक स्थल है। इसे कालका देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवी कालका के प्रकट होने से इस स्थान का संबंध है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार गुफा के अंदर दो सुरंगें हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनका संबंध हिंगलाज माता मंदिर से है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं स्थानीय परंपराओं का हिस्सा हैं। यहां हर महीने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
पंचमुखी हनुमान मंदिर: कराची में आस्था का प्रमुख केंद्र
कराची में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। मंदिर में मौजूद पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि यह स्वयंभू है। मंदिर की प्राचीनता को लेकर करीब 1,500 वर्ष पुराना होने का दावा किया जाता है।यह मंदिर कराची के हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है और यहां विभिन्न धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

वरुण देव मंदिर: समुद्र किनारे सदियों पुरानी आस्था
कराची के मनौरा बीच पर स्थित वरुण देव मंदिर समुद्र के देवता वरुण को समर्पित है। इस मंदिर का संबंध सिंधी हिंदू समुदाय की समुद्री परंपराओं से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पुराने समय में समुद्री यात्रा पर जाने वाले व्यापारी और नाविक यहां पूजा करते थे। समय के साथ मंदिर की इमारत को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद इसके संरक्षण और पुनरुद्धार के प्रयास किए गए। मनौरा का यह मंदिर सिंध की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

धार्मिक विरासत की अलग तस्वीर
पाकिस्तान में मौजूद ये मंदिर वहां की हिंदू धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े हुए हैं। हिंगलाज माता और कटास राज जैसे स्थलों का धार्मिक महत्व भारत समेत दूसरे देशों के हिंदू श्रद्धालुओं के बीच भी है। इन मंदिरों का इतिहास, स्थानीय मान्यताएं और भौगोलिक स्थिति इन्हें एक-दूसरे से अलग पहचान देती है।







