तोप के मुहाने पर भी नहीं झुका स्वाभिमान: 169वें बलिदान दिवस पर गूंजी अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की वीरगाथा… देखें पूरे वीडियो

सिवनी, यश भारत । 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले गोंडवाना के वीर राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस शुक्रवार को जिलेभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर धनोरा के रेस्टहाउस चौक स्थित दोनों वीरों की प्रतिमाओं पर सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजन-अर्चन कर माल्यार्पण किया गया तथा श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
कार्यक्रम में धनोरा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह उइके सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। धनोरा जनपद क्षेत्र की 47 ग्राम पंचायतों से पहुंचे ग्रामीणों ने शहीद प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर दोनों वीरों को नमन किया। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी समाजजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।
जनपद पंचायत उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह उइके ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के खिलाफ लोगों को संगठित करने का प्रयास किया। दोनों पिता-पुत्र कवि भी थे और अपनी रचनाओं तथा कविताओं के माध्यम से लोगों में देशभक्ति एवं स्वाभिमान की भावना जागृत करते थे। सरकारी अभिलेखों में भी दोनों को 1857 के विद्रोह से जुड़े जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी के रूप में दर्ज किया गया है।
इतिहास के अनुसार राजा शंकर शाह गोंड साम्राज्य के राजा निजाम शाह के वंशज थे। 1857 के विद्रोह के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन का विरोध किया। ब्रिटिश अधिकारियों ने राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह को गिरफ्तार किया। 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में अंग्रेजों ने दोनों को तोप के मुहाने से बांधकर मृत्युदंड दिया। उनके बलिदान को आज भी स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय प्रतिरोध के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ऐसे वीरों के इतिहास और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है। आयोजन का उद्देश्य गोंडवाना की ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को याद करना तथा भावी पीढ़ियों को इससे परिचित कराना रहा।
राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की स्मृति में जबलपुर में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय भी स्थापित किया गया है, जिसका उद्घाटन 15 नवंबर 2024 को हुआ। संग्रहालय में गोंडवाना की विरासत, 1857 के संघर्ष और जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को प्रदर्शित किया गया है।







