
जबलपुर, यश भारत। विजयनगर क्षेत्र में नगर निगम की बाजार बैठकी वसूली और अतिक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के बावजूद कई स्थानों पर अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर, इन्हीं कारोबारियों से बाजार बैठकी वसूले जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में राजस्व व अतिक्रमण अमले के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि सड़क किनारे कारोबार करने वालों से निगम बाजार बैठकी वसूल रहा है तो सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। क्या बैठकी वसूली के बाद संबंधित कारोबारियों को वहां कारोबार करने की अनुमति मिल जाती है या फिर अतिक्रमण के खिलाफ अलग से कार्रवाई का प्रावधान है, यह स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
वसूली व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल
बाजार बैठकी वसूली की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल सामने आ रहे हैं। विजयनगर में बैठकी वसूलने के लिए कौन अधिकृत है, प्रतिदिन कितनी राशि वसूल की जाती है और यह राशि निगम के खाते में किस प्रक्रिया के तहत जमा होती है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।यदि वसूली का जिम्मा नियमित निगम अमले के बजाय किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को दिया गया है तो उसकी नियुक्ति, अधिकार और वसूली की अनुमति से संबंधित रिकॉर्ड भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। साथ ही कारोबारियों को दी जाने वाली रसीदों और निगम खाते में जमा राशि का मिलान भी व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकता है।
वसूली और अतिक्रमण की निगरानी में अंतर क्यों?
निगम द्वारा अधिकृत वसूलीकर्ताओं की सूची, उनके पहचान पत्र, रसीद व्यवस्था और जमा राशि का रिकॉर्ड सामने आने से तस्वीर साफ हो सकती है। इसके साथ ही जिन स्थानों पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं, वहां निगम द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि बाजार से राजस्व वसूलने और अतिक्रमण नियंत्रित करने वाली दोनों व्यवस्थाएं आपस में किस तरह समन्वय के साथ काम कर रही हैं।






