दो माह की गर्भवती महिला के कपड़े उतरवाकर मारपीट का आरोप : क्षेत्र में जमकर बवाल, थाना घेराव के प्रयास पर आंसू गैस और लाठीचार्ज


बालाघाट/किरनापुर। किरनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम टीमकीटोला निवासी चौधरी दंपती के साथ पोस्ट ऑफिस में हुई कथित चोरी के मामले में पूछताछ के दौरान मारपीट किए जाने के आरोपों ने मंगलवार को गंभीर रूप ले लिया। मरार माली समाज का आरोप है कि पूछताछ के लिए थाने लाई गई करीब दो माह की गर्भवती सावित्री चौधरी के साथ कथित रूप से मारपीट की गई और उनके कपड़े उतरवाकर अमानवीय व्यवहार किया गया। महिला के पति कैलाश चौधरी के साथ भी कथित मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।

इन्हीं आरोपों की निष्पक्ष जांच और चौधरी दंपती को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में मरार माली समाज के लोग रैली के रूप में किरनापुर थाना पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। थाना घेराव के प्रयास के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज के आरोप लगाए, जिसके बाद पथराव की स्थिति बनने की सूचना सामने आई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम टीमकीटोला निवासी सावित्री और उनके पति कैलाश चौधरी को पोस्ट ऑफिस में हुई कथित चोरी के मामले में पूछताछ के लिए 2 सितंबर को किरनापुर थाना लाया गया था। मरार माली समाज और दंपती से जुड़े लोगों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान कैलाश चौधरी के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की।
वहीं, महिला सावित्री के साथ भी कथित रूप से मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। समाज का कहना है कि जिस समय महिला को थाने लाया गया, उस समय वह करीब दो माह की गर्भवती थीं। इसके बावजूद उनके साथ कथित रूप से मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया गया।
कपड़े उतरवाकर मारपीट का गंभीर आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पूछताछ के दौरान महिला के कपड़े उतरवाए गए और उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। यह आरोप मरार माली समाज और दंपती से जुड़े लोगों की ओर से सामने आया है।
हालांकि, इस गंभीर आरोप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए इसे आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। घटना के संबंध में जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
समाज की मांग है कि महिला के साथ कथित व्यवहार की भी अलग से निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
चार पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित
दंपती से जुड़े आरोपों और शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक स्तर से चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, मरार माली समाज का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। समाज पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के साथ दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
न्याय की मांग को लेकर थाना पहुंचे समाजजन
मंगलवार को बड़ी संख्या में मरार माली समाज के लोग रैली के रूप में किरनापुर थाना पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने चौधरी दंपती को न्याय दिलाने और पुलिस पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान थाना परिसर और आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। जब प्रदर्शनकारियों ने थाना घेराव का प्रयास किया तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान स्थिति बिगड़ने की जानकारी सामने आई।
लाठीचार्ज के आरोप के बाद पथराव
प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर लाठीचार्ज किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद भीड़ की ओर से पथराव किए जाने की सूचना सामने आई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की जानकारी है।
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान पथराव की शुरुआत कैसे हुई, पुलिस ने किस परिस्थिति में बल प्रयोग किया और कार्रवाई की आवश्यकता किन परिस्थितियों में बनी, इन सभी बिंदुओं की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की मांग
मरार माली समाज ने प्रशासन से चौधरी दंपती के साथ थाने में कथित मारपीट, महिला की गर्भावस्था के बावजूद कथित व्यवहार और कपड़े उतरवाने जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
समाज का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज, पथराव और आंसू गैस के इस्तेमाल की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
फिलहाल मामले में दंपती द्वारा लगाए गए आरोप, समाज की मांग, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम—सभी की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच रिपोर्ट और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।







