
जबलपुर, यश भारत। शहर में बारिश की पहली बूंद गिरते ही मौसम सुहाना होने के बजाय लोगों की चिंता बढ़ जाती है। वजह है बिजली। बादल घिरते ही लोग मोबाइल चार्ज करने से लेकर इन्वर्टर संभालने तक की तैयारी में जुट जाते हैं, क्योंकि हल्की बारिश के साथ ही कई इलाकों में बिजली गुल होना अब आम बात बनती जा रही है। कई जगह सप्लाई घंटों बाद बहाल होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर
गढ़ा, रांझी, हनुमानताल, अधारताल, मढ़ाताल सहित कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रिपिंग और फॉल्ट की शिकायतें सामने आती रहती हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग हर साल मेंटेनेंस के नाम पर काम करता है, लेकिन बारिश आते ही व्यवस्था की असली तस्वीर सामने आ जाती है।
आम इलाकों में लंबी कटौती, वीआईपी क्षेत्र पर उठ रहे सवाल
शहर के आम इलाकों में घंटों बिजली बंद रहने के बीच सिविल लाइंस जैसे वीआईपी क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यहां प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आवास हैं। लोगों का आरोप है कि वीआईपी क्षेत्र में फॉल्ट होने पर सुधार तेजी से होता है, जबकि आम उपभोक्ता को घंटों इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, बिजली विभाग को स्पष्ट करना होगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में सप्लाई और फॉल्ट सुधार की व्यवस्था में वास्तव में कितना अंतर है।
बिजली विभाग अक्सर बारिश के दौरान करंट फैलने और हादसे के खतरे को देखते हुए सप्लाई बंद करने की बात कहता है। सुरक्षा जरूरी है, लेकिन उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि बारिश के दौरान यही समस्या हर साल सामने आती है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जाता? पुराने तार, जर्जर उपकरण, पेड़ों की शाखाओं और कमजोर नेटवर्क की समस्या को समय रहते दूर क्यों नहीं किया जाता?
मेंटेनेंस के बाद भी क्यों नहीं सुधरी व्यवस्था
उपभोक्ता बिजली बिल समय पर जमा करता है और निर्बाध बिजली की उम्मीद करता है। लेकिन बारिश की कुछ बूंदों के साथ यदि फीडर ट्रिप हो जाए और परिवार घंटों अंधेरे में बैठा रहे तो विभाग के मेंटेनेंस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि बिजली विभाग बताए कि बारिश से पहले कितने फीडरों, ट्रांसफार्मरों, लाइनों और उपकरणों का मेंटेनेंस किया गया और इसके बाद भी बार-बार फॉल्ट क्यों हो रहे हैं।







