
झाड़ियों में दबे मैदान-पार्क; जंग खा रहे झूले
जबलपुर यशभारत। रेलवे की करीब एक हजार आबादी वाली नेहरू रेलवे कॉलोनी इन दिनों सफाई व्यवस्था की बदहाली से जूझ रही है। कॉलोनी के मैदान और चिल्ड्रन पार्क महीनों से झाड़ियों की गिरफ्त में हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि बच्चों के खेलने की जगह जहरीले जीव-जंतुओं और आवारा कुत्तों के लिए सुरक्षित ठिकाने में बदलती जा रही है। सांप समेत अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने की घटनाओं ने रहवासियों में दहशत पैदा कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि खतरे की यह तस्वीर जिम्मेदार अधिकारियों को दिखाई क्यों नहीं दे रही? जानकारी के मुताबिक करीब 300 रेल आवासों में रहने वाले परिवारों के लिए कॉलोनी का चिल्ड्रन पार्क और खेल मैदान महज नाम के रह गए हैं। उल्लास भवन के सामने मैदान चारों तरफ से झाड़ियों से घिरा है, जबकि चिल्ड्रन पार्क में लगे झूले और खेल उपकरण जर्जर होकर जंग खा रहे हैं। बच्चों को सुरक्षित खेल का स्थान उपलब्ध कराने के बजाय रेलवे की अनदेखी ने उन्हें जोखिम के बीच छोड़ दिया है।
झाड़ियों में छिपा खतरा, बच्चों पर सबसे ज्यादा आफत
कॉलोनी में लंबे समय से झाड़ियों की कटाई और नियमित सफाई नहीं होने के कारण जहरीले जीव-जंतुओं के छिपने की आशंका बनी रहती है। सांप निकलने की घटनाओं से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का माहौल है। शाम होते ही पार्क और मैदान की ओर जाने से लोग बचने लगे हैं। दूसरी ओर झाड़ियों के बीच आवारा कुत्तों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। पार्क के झूले जर्जर, मैदान बना कुत्तों का अड्डा जिस पार्क में बच्चों की चहल-पहल होनी चाहिए, वहां जंग लगे झूले और उगी हुई झाड़ियां रेलवे की रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। खेल मैदान की स्थिति भी चिंताजनक है। सफाई के अभाव में यह स्थान आवारा कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनता जा रहा है। ऐसे में बच्चों के साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मेडिकल-इंजीनियरिंग के बीच जिम्मेदारी, रहवासी भुगत रहे खामियाजा इस संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक कॉलोनी की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी मेडिकल और इंजीनियरिंग विभागों के बीच बंटी होने की बात सामने आ रही है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय नहीं होने का खामियाजा अब कॉलोनी के रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब समस्या महीनों से बनी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान क्यों नहीं करा रहे?

क्या हादसे के बाद जागेगा रेलवे..?’
नेहरू रेलवे कॉलोनी आवासीय समिति द्वारा संबंधित अधिकारियों के समक्ष झाड़ियों की कटाई, नियमित सफाई, पार्क और खेल मैदान के रखरखाव तथा आवारा कुत्तों की समस्या दूर करने की मांग की जा रही है। रहवासियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को किसी बच्चे, बुजुर्ग या महिला के साथ घटना होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। एक हजार की आबादी वाली कॉलोनी में जब जहरीले जीव-जंतुओं और आवारा कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ रहा हो, तब जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल उठना लाजिमी है। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन इस बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए कदम उठाता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागेगा। जवाबदेही तय होना जरूरी नेहरू रेलवे कॉलोनी में सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी जिस भी विभाग की हो, जवाबदेही तय होना जरूरी है। झाड़ियों की तत्काल कटाई, पार्क की मरम्मत और आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। रेलवे प्रशासन को कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर मौके पर कार्रवाई करनी होगी।







