स्टाइपेंड को लेकर आर-पार की लड़ाई, मेडिकल में डॉक्टरों ने किया काम बंद, देखे वीडियो …….
हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था,इलाज के लिए भटकते रहे मरीज

जबलपुर,यशभारत। भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के विरोध में जबलपुर के जूनियर और इंटर्न डॉक्टर भी आंदोलन पर उतर आए हैं। बुधवार से नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। डॉक्टरों ने नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी का बहिष्कार किया, हालांकि इमरजेंसी एवं अन्य जरूरी चिकित्सा सेवाएं जारी रखी गईं। डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दूर-दराज से इलाज के लिए मेडिकल अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ा।
सुबह से ही बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे, लेकिन नियमित सेवाएं प्रभावित होने से उन्हें डॉक्टरों के इंतजार में परेशान होना पड़ा। कई मरीजों को बिना इलाज या जांच के वापस लौटना पड़ा, जबकि कुछ मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ी। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की परेशानी और बढ़ गई, क्योंकि आने-जाने में समय और पैसा खर्च करने के बाद भी उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका।
ओपीडी से लेकर ऑपरेशन तक असर
नियमित ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार से नए मरीजों के साथ फॉलोअप के लिए पहुंचे मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पहले से निर्धारित गैर-आपातकालीन ऑपरेशन प्रभावित हुए। कई मरीजों और उनके परिजनों को ऑपरेशन की तारीख आगे बढ़ने की चिंता रही। हालांकि अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गईं, जिससे गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलती रही। मरीजों का कहना था कि मेडिकल अस्पताल में पहले से ही बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी प्रभावित होने से उपचार की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।
30 हजार रुपए स्टाइपेंड की मांग
आंदोलन कर रहे डॉक्टरों की प्रमुख मांग इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रतिमाह करना है। इसके अलावा भोपाल में प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन की घटना की जांच, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों पर कार्रवाई, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था, डॉक्टरों के अधिकारों की सुरक्षा और सरकार द्वारा पूर्व में किए गए आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की सेवा और चिकित्सा प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर लंबे समय से अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
आईएमए ने भी किया समर्थन
इधर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने भी इंटर्न डॉक्टरों की मांगों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। आईएमए ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 30 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है। आईएमए पदाधिकारियों का कहना है कि मांगी गई राशि अन्य राज्यों में दिए जा रहे स्टाइपेंड के अनुरूप है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे भावी चिकित्सकों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। हड़ताल के दौरान अध्यक्ष डॉ. दीपक त्रिपाठी, डॉ. शशांक शेखर, डॉ. पार सिंह, डॉ. खुशीराम, डॉ. राजेंद्र सहित अन्य जूनियर एवं इंटर्न डॉक्टर मौजूद रहे।







