सागर में जहरीली शराब कांड ने खोली आबकारी तंत्र की पोल,यूपी के ललितपुर से नकली शराब आने का शक
क्या केवल तस्कर पकड़े जाएंगे या जिम्मेदारों पर भी होगी कार्रवाई?

देवेंद्र केसरवानी की ख़ास रिपोर्ट
सागर, यशभारत। बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में कथित जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने जिले में अवैध और नकली शराब के कारोबार के साथ आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से नकली शराब की सप्लाई का शक सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियां इस एंगल से पड़ताल कर रही हैं। सवाल यह है कि यदि सीमावर्ती क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय था तो आबकारी तंत्र की निगरानी कहां थी?
शिकायत पहले मिली, कार्रवाई बाद में भी क्यों नहीं?
स्थानीय शराब ठेकेदारों के मुताबिक इलाके में ‘बॉम्बे व्हिस्की’ के नाम पर कथित नकली शराब बिकने की शिकायत आबकारी विभाग तक पहले ही पहुंच चुकी थी। घटना से करीब चार दिन पहले लाइसेंसी ठेकेदारों की बैठक में भी अवैध और नकली शराब की सप्लाई का मुद्दा उठाया गया था। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप अब विभाग को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। जांच का अहम सवाल यही है कि शिकायत मिलने के बाद विभाग ने क्या कार्रवाई की।
20 साल से सागर में पदस्थ अधिकारियों पर उठे सवाल
आबकारी विभाग में लंबे समय से सागर जिले में पदस्थ कुछ अधिकारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारी करीब 20 वर्षों से सागर में ही पदस्थ हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि तबादला होने की स्थिति में प्रभाव का इस्तेमाल कर पदस्थापना रुकवाने के प्रयास किए जाते हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। विदेशी मदिरा वेयरहाउस से जुड़े अधिकारियों की लंबे समय से पदस्थगी को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।
हाईवे के ढाबों तक कैसे पहुंच रही अवैध शराब?
सागर जिले के हाईवे पर स्थित ढाबों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध शराब पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में बांदरी के पास सौरभ ढाबे से 300 से अधिक पेटी शराब और करीब 10 लाख रुपए की नकदी जब्त किए जाने का मामला सामने आया था। अब बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब वहां तक कहां से पहुंची। शराब की सप्लाई के स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कार्रवाई कहां तक पहुंची, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिर भी नहीं थमा कारोबार
सागर में कुछ समय पहले नकली शराब का मामला भी सामने आया था। इसके बावजूद बाजार में कम कीमत पर शराब उपलब्ध होने की शिकायतें और चर्चाएं जारी हैं। स्थानीय स्तर पर 130 रुपए में बिकने वाला पाव 70 रुपए में मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी कम कीमत पर शराब की आपूर्ति कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है।
वेयरहाउस से बाजार तक शराब की सप्लाई की जांच की मांग
विदेशी मदिरा वेयरहाउस से शराब की निकासी और उसके बाद बाजार तक पहुंचने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सस्ती दर पर उपलब्ध होने वाली शराब की सप्लाई व्यवस्था की गहन जांच होनी चाहिए। वेयरहाउस से लेकर ठेकेदार और फिर बाजार तक शराब पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अवैध शराब की आपूर्ति का स्रोत क्या है।
मौतों के बाद जागा प्रशासन, अब जवाबदेही की बारी
घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में जांच और स्वास्थ्य स्क्रीनिंग शुरू कराई है। शराब के नमूने जब्त कर जांच के लिए भेजे गए हैं। मौतों की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों और प्रभारी मंत्री को मौके पर भेजने तथा जांच के निर्देश दिए हैं।
क्या केवल तस्कर पकड़े जाएंगे या जिम्मेदारों पर भी होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कार्रवाई केवल नकली शराब बनाने और बेचने वालों तक सीमित रहती है या उस पूरे तंत्र की भी जांच होगी, जिसकी निगरानी में अवैध शराब के कारोबार के आरोप सामने आते रहे हैं। लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों, विदेशी मदिरा वेयरहाउस की व्यवस्था, हाईवे के ढाबों तक पहुंचने वाली शराब और कम कीमत पर बाजार में बिक रही शराब के स्रोत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।







