रतापानी टाइगर रिजर्व के दो गांवों की बदलेगी तस्वीर – स्वैच्छिक पुनर्वास योजना के तहत भोपाल-जबलपुर हाईवे के किनारे बसेंगे ग्रामीण

रतापानी टाइगर रिजर्व के दो गांवों की बदलेगी तस्वीर
– स्वैच्छिक पुनर्वास योजना के तहत भोपाल-जबलपुर हाईवे के किनारे बसेंगे ग्रामीण

भोपाल, यश भारत । रतापानी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बसे दो गांवों की अब नई पहचान बनने जा रही है। वर्षों से जंगल के बीच बसे इन गांवों के लोग अब स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास योजना के तहत नई जगह पर अपना आशियाना बनाएंगे। भोपाल-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे दोनों गांवों के लिए नए पुनर्वास स्थल तैयार किए जा रहे हैं। यहां पहुंचने के बाद ग्रामीणों को न केवल नया घर मिलेगा, बल्कि खेती और बेहतर सुविधाओं के साथ जीवन को नई दिशा देने का अवसर भी मिलेगा।
पुनर्वास की सबसे खास बात यह है कि गांवों को केवल दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जा रहा, बल्कि वहां ग्रामीणों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई बसाहट विकसित की जा रही है। प्रत्येक परिवार को दो हेक्टेयर कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। वन विभाग नए गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न सरकारी विकास योजनाओं को भी जोड़ेगा। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ बेहतर तरीके से मिलने की उम्मीद है।
नाम वही, गांव की पहचान वही
नई जगह पर बसने के बावजूद दोनों गांव अपनी पुरानी पहचान नहीं खोएंगे। ग्रामीणों की सामाजिक और सामुदायिक पहचान को बनाए रखने के लिए नए पुनर्वास स्थल पर भी दोनों गांवों के पुराने नाम बरकरार रखे जाएंगे। एक ही समुदाय के परिवारों को एक स्थान पर बसाया जाएगा, जिससे उनके सामाजिक रिश्ते और सामुदायिक जीवन की निरंतरता बनी रहेगी।
गांव हटेंगे तो जंगल को मिलेगा विस्तार
दोनों गांवों के कोर क्षेत्र से बाहर पुनर्वासित होने का सीधा लाभ रतापानी के जंगल और वन्यजीवों को मिलेगा। ग्रामीण बसाहट और मानवीय गतिविधियां कम होने के बाद पुराने गांवों के क्षेत्र को वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे कोर क्षेत्र में वन्यजीवों को अधिक सुरक्षित और निर्बाध वातावरण मिलेगा।
वन विभाग द्वारा पुराने गांवों के आसपास के जंगल में आवास की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न हैबिटेट विकास कार्य भी किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के लिए भोजन, पानी और सुरक्षित आवास की उपलब्धता बेहतर करने की दिशा में काम होगा।
नई जगह का लिया जायजा
वन विभाग के अधिकारी कृष्णमूर्ति, आईएफएस ने शनिवार सुबह दोनों गांवों के पुनर्वास स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने भोपाल-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे विकसित किए जा रहे नए गांवों की व्यवस्थाओं और स्थल की स्थिति का जायजा लिया। इसके साथ ही रतापानी डैम और पार्क के इकोटूरिज्म क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया।
रतापानी के इन दो गांवों का पुनर्वास ग्रामीणों के लिए जहां नई शुरुआत है, वहीं टाइगर रिजर्व के लिए कोर एरिया को मानवीय दबाव से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक तरफ ग्रामीणों को नई जमीन, नया घर और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, तो दूसरी ओर जंगल को वन्यजीवों के लिए नया और सुरक्षित विस्तार मिलेगा।







